दो दिवसीय पुस्तक लेखन कार्यशाला – भारतीय महिलाएँ: सिद्धांत, शोध और परिप्रेक्ष्य,महिला अध्ययन विभाग
बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल

महिला अध्ययन विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा “भारतीय महिलाएँ: सिद्धांत, शोध और परिप्रेक्ष्य” विषय पर दो दिवसीय पुस्तक लेखन कार्यशाला का उद्घाटन 10 मार्च 2026 को समाजशास्त्र विभाग के सेमिनार हॉल में किया गया। यह कार्यशाला पीएम-यूएसएचए योजना के सॉफ्ट कंपोनेंट के अंतर्गत सीईडीएमएपी(CEDMAP), भोपाल के सहयोग से आयोजित की गई है,

जो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उत्सव का हिस्सा है।कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी पुस्तक “भारतीय महिलाएँ: सिद्धांत, शोध और परिप्रेक्ष्य” की रूपरेखा को अंतिम रूप देना था। इस कार्यशाला का लक्ष्य विभिन्न विद्वानों और शोधकर्ताओं को एक साझा मंच पर लाकर पुस्तक की विषयगत संरचना, अध्याय विभाजन तथा शोध पद्धति पर विचार-विमर्श करना था। इसके साथ ही कार्यशाला में महिला अध्ययन से जुड़े विविध आयामों—सैद्धांतिक दृष्टिकोण, अनुभवजन्य शोध, सांस्कृतिक संदर्भ तथा अंतर्विभाजक दृष्टिकोण—पर गहन चर्चा की गई। सहयोगात्मक संवाद और अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि पुस्तक भारतीय महिलाओं के जीवनानुभवों की समृद्धि और अंतर्विषयी शोध की कठोरता दोनों को प्रतिबिंबित करे।
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ प्रो. रुचि घोष दस्तीदार, विभागाध्यक्ष, महिला अध्ययन विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय द्वारा स्वागत भाषण और कार्यशाला परिचय से हुआ। उन्होंने सहयोगात्मक अकादमिक लेखन और भारतीय महिलाओं के अनुभवों के दस्तावेजीकरण की महत्ता पर बल दिया, जो आगामी पुस्तक भारतीय महिलाएँ: सिद्धांत, शोध और परिप्रेक्ष्य में संकलित होगी।
मुख्य वक्तव्य प्रो. राका आर्या, प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान एवं अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (एनएलआईयू), भोपाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने महिला अध्ययन में सिद्धांत और व्यवहार के समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं की बदलती स्थिति पर चर्चा करते समय सांस्कृतिक विविधताओं और भिन्नताओं को ध्यान में रखना चाहिए , उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और नारीवादी सिद्धांत के विभिन्न आयामों पर भी प्रकाश डाला।
विशेष वक्तव्य प्रो. हरिराम रैदास, सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, भोपाल द्वारा दिया गया। उन्होंने भारतीय चिंतन और साहित्य में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के सांस्कृतिक एवं दार्शनिक आयामों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में महिलाओं के योगदान पर विचार प्रस्तुत किए।
कार्यशाला का आयोजन माननीय कुलपति प्रो. एस.के. जैन, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के मार्गदर्शन में हुआ। अपने संदेश में उन्होंने महिलाओं की आवाज़ और दृष्टिकोण को सशक्त बनाने वाले शैक्षणिक प्रयासों के महत्व पर बल दिया और विश्वविद्यालय की समावेशी शोध के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। सत्र की अध्यक्षता प्रो. विवेक शर्मा, विभागाध्यक्ष, सीआरआईएम विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय ने की।
डॉ. अभिलाषा भास्कर और डॉ. रेखा खंडिया, पीएम-यूएसएचए योजना की समन्वयक, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय ने सभा को संबोधित किया और योजना की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो शैक्षणिक एवं संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करती है।
उद्घाटन सत्र के बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न योगदानकर्ताओं ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और पुस्तक के अध्यायों एवं रूपरेखा को अंतिम रूप दिया।
सत्र का संचालन डॉ. जया फूकन द्वारा किया गया और अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें सभी गणमान्य अतिथियों, सहयोगियों और प्रतिभागियों के योगदान को सराहा गया।
कार्यशाला का दूसरा दिन 11 मार्च 2026 को आयोजित होगा, जिसमें सहभागात्मक सत्र, सहयोगात्मक लेखन अभ्यास और चर्चाएँ होंगी, जिनका उद्देश्य भारतीय महिलाओं के सिद्धांत, शोध और परिप्रेक्ष्य पर विद्वत्तापूर्ण योगदान तैयार करना है।
आयोजक: महिला अध्ययन विभाग, बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल
सहयोग: सीईडीएमएपी( CEDMAP), भोपाल
पीएम-यूएसएचए योजना के सॉफ्ट कंपोनेंट के अंतर्गत
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर
प्रथम दिवस – 10 मार्च, 2026



