मध्य प्रदेश

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व पर व्याख्यान

भारतीय वैज्ञानिकों के संघर्ष और एआई जैसी चुनौतियों पर हुआ मंथनभोपाल, 2 अप्रैल l बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से ज्ञान विज्ञान भवन, विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआl  जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:30 बजे अतिथियों के आगमन के साथ हुआ। इसके पश्चात माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप मंत्र के माध्यम से विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगीत “वंदेमातरम्” का सामूहिक गायन प्रस्तुत किया गयाl जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत हो गया।

अतिथियों के परिचय क्रम में प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री
जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह का परिचय दिया। इसके उपरांत राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय श्री राहुल सिंह परिहार ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री इन्दर सिंह परमार, मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश प्रदेश शासन का परिचय दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार जैन ने स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम की प्रासंगिकता एवं विषय की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता श्री जे. नंदकुमार ने अपने व्याख्यान में कहा कि विज्ञान एक सार्वलौकिक विषय है, किंतु आज विज्ञान और तकनीक नई समस्याएँ भी उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) का उल्लेख करते हुए कहा कि आज एआई कविता लिख सकता है, कालिदास के नाम से श्लोक रच सकता है और आने वाले समय में मतदान जैसे निर्णयों को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है और भविष्य में युद्ध भी तकनीक के माध्यम से लड़े जा सकते हैं, जिससे मानव समाज एक खतरनाक दौर की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल एक अकादमिक विषय नहीं है, बल्कि उसका सांस्कृतिक और सभ्यतागत पक्ष भी है, और आधुनिक तकनीकी समस्याओं का समाधान भारतीय विज्ञान दृष्टि में निहित है। साथ ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इन्दर सिंह परमार, मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भारत को कमतर आंकने का प्रयास किया गया और भारतीय समाज की वैज्ञानिक उपलब्धियों को छुपाया गया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय वैज्ञानिक विरासत को पुनः सामने लाने की
आवश्यकता हैl 

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. एस. बी. सिंह द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम बाबू मेहर, प्राध्यापक, प्रधानमंत्री उत्कृष्ट महाविद्यालय, नर्मदापुरम एवं मध्यभारत प्रांत शोध प्रमुख, प्रज्ञा प्रवाह ने किया।

भोपाल, 2 अप्रैल  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से ज्ञान विज्ञान भवन, विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआl  जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:30 बजे अतिथियों के आगमन के साथ हुआ। इसके पश्चात माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप मंत्र के माध्यम से विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगीत “वंदेमातरम्” का सामूहिक गायन प्रस्तुत किया गयाl जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत हो गया।

अतिथियों के परिचय क्रम में प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक श्री धीरेन्द्र चतुर्वेदी ने कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री
जे. नंदकुमार, अखिल भारतीय संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह का परिचय दिया। इसके उपरांत राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय श्री राहुल सिंह परिहार ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री इन्दर सिंह परमार, मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश प्रदेश शासन का परिचय दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलगुरु प्रोफेसर सुरेश कुमार जैन ने स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम की प्रासंगिकता एवं विषय की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता श्री जे. नंदकुमार ने अपने व्याख्यान में कहा कि विज्ञान एक सार्वलौकिक विषय है, किंतु आज विज्ञान और तकनीक नई समस्याएँ भी उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने कृत्रिम मेधा (एआई) का उल्लेख करते हुए कहा कि आज एआई कविता लिख सकता है, कालिदास के नाम से श्लोक रच सकता है और आने वाले समय में मतदान जैसे निर्णयों को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है और भविष्य में युद्ध भी तकनीक के माध्यम से लड़े जा सकते हैं, जिससे मानव समाज एक खतरनाक दौर की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल एक अकादमिक विषय नहीं है, बल्कि उसका सांस्कृतिक और सभ्यतागत पक्ष भी है, और आधुनिक तकनीकी समस्याओं का समाधान भारतीय विज्ञान दृष्टि में निहित है। साथ ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इन्दर सिंह परमार, मंत्री, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन ने अपने उद्बोधन में कहा कि ब्रिटिश शासनकाल में भारत को कमतर आंकने का प्रयास किया गया और भारतीय समाज की वैज्ञानिक उपलब्धियों को छुपाया गया। उन्होंने कहा कि आज भारतीय वैज्ञानिक विरासत को पुनः सामने लाने की
आवश्यकता हैl 

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. एस. बी. सिंह द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया तथा राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम बाबू मेहर, प्राध्यापक, प्रधानमंत्री उत्कृष्ट महाविद्यालय, नर्मदापुरम एवं मध्यभारत प्रांत शोध प्रमुख, प्रज्ञा प्रवाह ने किया।

Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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