भोपाल के 154 करोड़ के जीजी फ्लाईओवर में भ्रष्टाचार का डबल खेल, हाईकोर्ट में खुली पोल – प्रभारी चीफ इंजीनियर गोपाल सिंह को फटकार सूत्र

भोपाल। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन (MPRDC) से लोक निर्माण विभाग में ब्रिज सेक्शन के प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाए गए गोपाल सिंह की बड़ी कमाई की पहली कोशिश अदालत में पहुंचते ही धराशायी हो गई।
दरअसल मामला भोपाल के बहुचर्चित जीजी फ्लाईओवर का है, जिसे भोपाल की ठेकेदार कंपनी वीवाईएससी इंफ्रा प्रोजेक्ट लि.ने 154 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है। आरोप है कि ब्रिज सेक्शन के तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय खांडे और जी.पी. वर्मा के कार्यकाल में ठेकेदार से मिलीभगत के चलते बहुत घटिया निर्माण हुआ। नतीजान जनवरी 2025 में लोकार्पित हुआ फ्लाईओवर एक साल भी नहीं टिका। सड़क उखड़ गई, बड़े-बड़े गड्ढे हो गए और जनता को हादसों का तोहफा मिलने लगा।
डिफेक्ट लायबिलिटी में सुधार की जगह 4.69 करोड़ का नया खेल
कॉन्ट्रैक्ट की शर्त साफ है कि मेंटेनेंस अवधि (Defect Liability Period) में टूटी सड़क को उसी ठेकेदार कंपनी को अपने खर्चे पर सुधारना होगा। विभाग ने भी 31 जुलाई को इसी शर्त का हवाला देकर कंपनी को 3 दिन में मरम्मत करने का नोटिस दिया था।
लेकिन मरम्मत शुरू होने से पहले ही नए प्रभारी चीफ इंजीनियर गोपाल सिंह ने बड़ा खेल कर दिया। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने एक दिन बाद ही 01 अगस्त को अपनी अनुशंसा पर ठेकेदार कंपनी को आनन-फानन में ब्लैकलिस्ट करवा दिया और फ्लाई ओवर की मरम्मत के लिए 4.69 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी करा दिया।
विभाग में चर्चा है कि मेंटेनेंस के काम को नए टेंडर में बदलने के पीछे तिजोरी भरने का पूरा प्लान था – ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करो, फिर उसी के बचे हुए काम के नाम पर नया टेंडर निकालो और नया कमीशन सेट करो।
हाईकोर्ट ने लगाई रोक, चीफ इंजीनियर को लगाई फटकार
इस खेल की भनक लगते ही दो जागरूक नागरिक याचिका लेकर जबलपुर हाईकोर्ट पहुंच गए। याचिका पर सुनवाई करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस *विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने विभाग के इस पूरे खेल पर ब्रेक लगा दिया।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए मरम्मत के लिए निकाले गए 4.69 करोड़ के नए टेंडर पर और ठेकेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई पर रोक लगा दी। बैंच ने प्रभारी चीफ इंजीनियर गोपाल सिंह को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेश दिया कि कॉन्ट्रैक्ट की शर्त के मुताबिक उसी ठेकेदार कंपनी से मरम्मत कराई जाए और अगली सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाए।
फटकार के बाद भी अवमानना – नुकसान का आकलन!
हैरानी की बात है कि हाईकोर्ट की फटकार और रोक के बाद भी ब्रिज सेक्शन के प्रभारी चीफ इंजीनियर गोपाल सिंह सुधरने को तैयार नहीं हैं। बताया जा रहा है कि वे अब भी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई को सही बता रहे हैं और बंद कमरे में इस बात का आकलन कर रहे हैं कि नया टेंडर निरस्त होने से तिजोरी में आने वाले धन का कितना नुकसान हुआ है।
यह सीधे-सीधे अदालत की अवमानना है। अब देखना होगा कि अदालत के आदेश के बाद भी अपनी जिद पर अड़े प्रभारी चीफ इंजीनियर पर हाईकोर्ट अगली सुनवाई में क्या कार्रवाई करता है। जो हमारे सूत्रों से प्राप्त जानकारी मिली है




