जापान में निकाली गई चौथी श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा

भारत-जापान मित्रता की एक प्रेरणादायक मिसाल
नागोया (जापान) । भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा जापान में भी श्रृद्धा के साथ निकाली गई। नागोया शहर में श्रीजगन्नाथ महाप्रभु की चौथी वार्षिक रथ यात्रा अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ संपन्न हुई। चार वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई इस पावन परंपरा ने जापान में रह रहे प्रवासी भारतीयों और जापानी श्रद्धालुओं को एक सुंदर सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सूत्र में जोड़ दिया है।
रथ यात्रा के संयोजक रुद्र मोहंती एवं उनकी धर्मपत्नी श्रद्धांजलि मोहती के प्रयासों से पिछले चार वर्षों में बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन से जुड़े हैं। इस वर्ष की रथ यात्रा में भारत और जापान दोनों देशों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भारत से भी अनेक प्रतिष्ठित कलाकार विशेष रूप से जापान पहुंचे, जिन्होंने अपनी मनमोहक नृत्य एवं संगीत प्रस्तुतियों से सभी को भावविभोर कर दिया। वहीं जापानी कलाकारों ने भारतीय एवं जापानी संस्कृति पर आधारित उत्कृष्ट सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विशेष रूप से ओडिशी नृत्य की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। दोनों देशों के कलाकारों की सहभागिता ने इस आयोजन को भारत-जापान की सांस्कृतिक एकता, मित्रता और पारस्परिक सम्मान का उदाहरण बना दिया।
रथ यात्रा के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा को श्रद्धापूर्वक रुद्र मोहंती के निवास पर पुनः विराजमान किया गया।
*भुवनेश्वर से लाया गया लकड़ी का रथ*
रथयात्रा के लिए उद्योगपति गौरव राहलन विशेष रूप से भुवनेश्वर से जापान पहुंचे। वे भारत से भगवान श्रीजगन्नाथ का पारंपरिक लकड़ी से निर्मित रथ भी साथ लेकर आए। इसका उपयोग अगले वर्ष से जापान में आयोजित होने वाली श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा में किया जाएगा। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत, श्रीजगन्नाथ संस्कृति के प्रति समर्पण तथा भारत-जापान के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रथ यात्रा के दौरान सभी श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की भी व्यवस्था की गई, जिसमें सभी ने प्रेम, श्रद्धा और भक्ति के साथ सहभागिता की।





