DE वाले कार्यपालन यंत्रीयो (EE) को मुख्य अभियंता का प्रभार,रेगुलर SE ऑफिस अटैच

मध्य प्रदेश अजब है गजब है जूनियर के नीचे सीनियर कार्य कर रहे हैं हम आपको बता दें कि जब कोई व्यक्ति शासकीय सेवा में आता है तो उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है
कोई विभागीय DE तो नहीं चल रही,कोई शिकायत तो नहीं है और कोई भ्रष्टाचार तो नहीं किया गया. यह सब उनकी cr में लिखा जाता है उसी के आधार पर उनको पदोन्नति दी जाती है
परंतु लोक निर्माण विभाग के तीन कार्यपालन यंत्री के के लॅच्छे,योगेंद्र सिंह और वी.क झा,अधीक्षण यांत्रि के पद पर पदोन्नत नहीं हो पाए, लेकिन शिकायत और जांच में फंसे कार्यपालन यंत्री,
प्रभारी मुखिया अभियंता बने रहने में सफल रहे.
ऐसे में शिकायतें और जांच में फंसे कार्यपालन यंत्री प्रभारी मुख्य अभियंता बने रहने पर सवाल उठ रहें.
लोक निर्माण विभाग में कार्यपालन यंत्री से अधिकक्षण यंत्री और सहायक यंत्री से कार्यपालन यंत्री की पदोन्नति पूरी हो चुकी है
डीपीसी में दो कार्यपालन यंत्री ने जी.के सरिवान और अजय लिखार को अधीक्षण यंत्री के पद पर पदोन्नति मिली!
जबकि रीवा के प्रभारी मुख्य अभियंता के के लॅच्छे इंदौर के ce योगेंद्र सिंह और ग्वालियर के प्रभारी ce झा को अपात्र पाए जाने के कारण पदोन्नति नहीं मिल सकी हैं
इसके बावजूद यह सभी प्रभारी मुख्य अभियंता के पद पर बने हुए हैं पदोन्नति से पहले पद रिक्त होने के कारण इंजीनियरों को दो पद ऊपर के प्रभाव दिए गए,लेकिन पदोन्नति के बाद नियम अनुसार एक पद ऊपर ही प्रभाव दिया जा सकता है
ऐसे में लॅच्छे,योगेंद्र और झा को दो पद ऊपर प्रभारी मुख्य अभियंता बनाए रखकर लोक निर्माण विभाग के अवसरों ने दोहरी मानसिकता अपनाई है.



