कुल गुरू के ख़ोज के लिए गठित चयन समिति पर उठने लगे सवाल

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुल गुरू के ख़ोज के लिए गठित चयन समिति ने अवैधानिक तरीके से महाविद्यालय के शिक्षक जो ना शोध और ना ही अध्यापन -अध्यापन कार्य किये है, का नाम साक्षात्कार पैनल में आगे बढ़ाने से पूरी चयन प्रक्रिया दूषित ?
माननीय सर्वोच्य न्यायालय/भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्देशों के उल्लंघन, कुलगुरू के शोध एवं अध्यापन अनुभव विश्वविद्यालय से इतर है और अध्ययन अध्यापन से कोई नाता नही।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय और जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, के कुलपति पद के लिए चयन प्रक्रिया के चयन समिति का अध्यक्ष अयोग्य और सदस्य, यूजीसी के निर्देशों के विरुद्ध बनाया गया है,जो लोग माननीय न्यायालयों के निर्देशों का भी उल्लंघन कर रहे हैं।
जहां कुलपति के लिए विश्वविद्यालय में 10 वर्षों के शिक्षण अनुभव वाले प्रोफेसरों को कॉलेज के अनुभवी लोगों की तुलना में हाशिए पर धकेल दिया गया है।
सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया से पता चला है कि अधिकांश कुलपतियों की दौड़ में शामिल महाविद्यालय के शिक्षकों के पास विश्वविद्यालय शिक्षण/अनुसंधान / विस्तार/नवाचार या प्रशिक्षण का कोई अनुभव नहीं है।
जानबूझकर अपने चहेतों और अयोग्य लोगों को कुलपति बनाने के लिए सबसे पहले चयन समिति में ऐसे लोग शामिल किए जा रहे है या गये है जो कुलगुरू क्या होता है का ही ज्ञान नहीं है । ऐसे लोग चयन समिति के अध्यक्ष बन जाते हैं और कॉलेज के अनुभवी, नियम विरुद्ध कार्य करने वाले, नियम, परिनियमावली की धज्जियां उड़ानें वाले लोगों का चयन करते हैं। जिससे विश्वविद्यालय के लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जा रहा है तथा जिसको पढ़ाने, नियम और परिनियमावली का ज्ञान नहीं को कुलगुरू बना दिया जाता है और जो अशासकीय महाविद्यालयों को संबद्धता और अवैध मूल्यांकन का धंधा करने लगते हैं..
यही नहीं कही खाली जमीन पर कालेज तो कहीं सरसों के खेतों में कालेज की संबद्धता देते है
इसलिए बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के चयन से महाविद्यालय के शिक्षकों को साक्षात्कार से बाहर किया जावे। कुछ लोग अनियमितता करने में माहिर है का पुलिस सत्यापन रिपोर्ट साक्षात्कार के पहले मंगाया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया।




