विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक का शुभारम्भ

जबलपुर। विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक का शुभारम्भ संस्कारधानी जबलपुर में सरस्वती शिक्षा परिषद कार्यालय के श्री रोशनलाल सक्सेना सभागार में शुक्रवार को हुआ । उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता पूज्य स्वामी नृसिंह देवाचार्य जी महाराज (नृसिंह पीठाधीश्ववर) ने की। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल जी (म.प्र. उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त माननीय न्यायधीश) विशिष्ट अतिथि डाॅ. कृष्ण गोपाल जी (मान. सह सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ), डाॅ. रविन्द्र कान्हेरे जी (मा. अखिल भारतीय अध्यक्ष, विद्याभारती), श्री गोविन्द चन्द्र महंत जी (अ.भा. संगठन मंत्री, विद्याभारती) एवं श्री देशराज जी शर्मा अ.भा. महामंत्री विद्याभारती थे। इस बैठक में देश के सभी प्रान्तो से लगभग 200 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, यह बैठक 13 सितम्बर सायं तक चलेगी।
बैठक के प्रारम्भ में दिवंगत प्रतिष्ठित नागरिकों एवं असम और नेपाल में आई बाढ़ में असमय काल कवलीत हुए नागरिकों को श्रीमान् देश राज शर्मा जी ने स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
बैठक की प्रस्तावना रखते हुए श्री गोविन्द चन्द महंत ने कहा कि विद्याभारती का कार्य 1952 से आरम्भ होकर अब 75 वर्ष होने जा रहे हैं। अपने कार्य का लक्ष्य हिन्दुत्वनिष्ठ और राष्ट्रभक्ति है। सभी विद्यालयों और देश में शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का जो प्रयास आरम्भ हुआ था उस दिशा में अपना कार्य बढ़ रहा है। देश के प्रत्येक प्रदेश में विद्याभारती का शिक्षा माॅडल पहुंचा है। इसकी निरंतर समीक्षा करते हुए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की दिशा में आगे बढना इस दृष्टि से इस बैठक में अनेक विषयों पर विचार विमर्श करने वाले हैं।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पालीवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जो ’’कर्मण्येवाधिकारस्ते’’का संदेश दिया उसी भाव से विद्याभारती के कार्यकर्ता कार्य में लगे हैं और राष्ट्र के लिए चरित्र निर्माण के महत्वपूर्ण कार्य को कर रहे हैं। भारत को स्वतंत्रता के पश्चात यह अपेक्षा थी कि भारत केन्द्रित शिक्षा व्यवस्था के द्वारा भारत को विश्वगुरू बनाने की ओर अपना देश बढ़ेगा किन्तु र्दुभाग्य से मैकाले और मार्क्स के अनुयायियों ने उसी शिक्षा को आगे बढाया जो देश के लिए अनुपयोगी थी। उन्होंने कहा कि विद्याभारती ने देश के लिए उपयोगी शिक्षा को अपनाकर समाज के सामने एक प्रतिमान स्थापित किया है। सौभाग्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारत केन्द्रित शिक्षा का माॅडल देश के सामने आया है इसमें विद्याभारती का प्रयास प्रशन्सनीय हैं।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प.पू. स्वामी नृसिंह देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि विद्याभारती शब्द अपने आप में गौरव लिये हुए है। विवेक, सम्यक कर्म, सम्यक ज्ञान, सम्यक भक्ति है । इन तीनों के समन्वय द्वारा व्यक्ति निर्माण से राष्ट्रनिर्माण का कार्य विद्याभारती कर रही है। शिक्षा का लक्ष्य है सनातन संस्कृति आगे बढनी चाहिए। अपनी धर्म संस्कृति के प्रति गौरव का भाव होना चाहिए। वे भाग्यशाली हैं जिनका जीवन समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित है। हमारी सनातन संस्कृति में सब एक हैं । व्यक्ति को द्वन्दों से ऊपर उठना है। राष्ट्र का निर्माण सब के प्रयासों और प्रयत्नों से होगा। वर्तमान शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण में सहायक होगी। आप संस्कार और राष्ट्रभाव का समावेश करने वाले हैं।
प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत श्री सुधीर अग्रवाल (सचिव सरस्वती शिक्षा परिषद, जबलपुर) एवं श्री नितिन चौधरी (सर्व व्यवस्था प्रमुख) ने किया। सत्र का संचालन श्री विवेक शेण्डेय क्षेत्रीय अध्यक्ष (मध्यक्षेत्र) ने किया।







