मध्य प्रदेश

स्वदेशी केवल नारा नहीं, इसे दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लें : राज्यपाल मंगुभाई पटेल



भोपाल। स्वदेशी केवल ‘लोकल फॉर वोकल’ का नारा सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को इस बात पर ध्यान देना होगा कि सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक वह अपने दैनिक जीवन में कितनी स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करता है। देश में बनी वस्तुओं को प्राथमिकता देना और स्वदेशी उत्पादों को अपनाना हम सभी का संकल्प होना चाहिए। यह बात मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई छगनभाई पटेल ने बुधवार को स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन द्वारा शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में आयोजित स्वदेशी मेले के समापन अवसर पर कही।

राज्यपाल ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि देशभर में अब तक स्वदेशी जागरण मंच द्वारा 800 मेले आयोजित किए जा चुके हैं। भोपाल में दूसरे वर्ष आयोजित इस मेले में 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए और बिक्री भी अच्छी हुई। यह लघु उद्यमियों के लिए उत्साहजनक बात है। मेले में स्थानीय उत्पादों और महिला उद्यमियों की सक्रिय भागीदारी देखकर प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि राष्ट्र सेवा और स्वावलंबन की नींव स्वदेशी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वदेशी की भावना को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है।

पटेल ने कहा कि मेले में आने वाले लोगों को केवल स्वयं स्वदेशी वस्तुएं खरीदकर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि अपने घर और आसपास के लोगों को भी बताना चाहिए कि उन्होंने मेले से कौन-कौन से स्वदेशी उत्पाद खरीदे हैं। इससे स्वदेशी का भाव अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगा। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए पूरे मेला परिवार को बधाई दी।

स्वदेशी और वंदे मातरम ने स्वतंत्रता सेनानियों में जगाई थी आजादी की लौ : पद्मश्री मोहन नगर

मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन नगर ने भोपाल में दूसरे वर्ष स्वदेशी मेले के सफल आयोजन के लिए स्वदेशी जागरण मंच को बधाई दी। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में दो मूल मंत्र रहे, पहला वंदे मातरम और दूसरा स्वदेशी। इन दोनों ने स्वतंत्रता सेनानियों के भीतर देश की आजादी के लिए संघर्ष की भावना जगाई और इन्हीं के आधार पर देश स्वतंत्र हुआ।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद सत्ता में आई सरकारों ने विदेशी प्रभाव के चलते स्वदेशी के महत्व को उतनी प्राथमिकता नहीं दी, जितनी देश को मजबूत बनाने के लिए जरूरी थी। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी की आवाज फिर से पूरे देश में बुलंद हुई। ‘लोकल फॉर वोकल’ जैसे आह्वान के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को अपनाने पर जोर दिया गया। जब हम बाहर से सामान मंगाते हैं, तो उस पर कई तरह के कर लगते हैं, जबकि स्वदेशी वस्तुएं अपनाने से देश का पैसा देश में ही रहता है। उन्होंने प्रदेश में स्वदेशी को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल का आभार व्यक्त किया।

लघु उद्यमियों और महिलाओं को मंच देना मेले का उद्देश्य : सतीश विश्वकर्मा

मेले की प्रस्तावना रखते हुए मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा ने कहा कि यह मेला बिना लाभ-हानि के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और बड़े शहरों में काम कर रहे लघु उद्यमियों को एक मंच उपलब्ध कराना है, ताकि उनके उत्पादों को बाजार मिल सके और वे अपने काम को आगे बढ़ा सकें। स्वदेशी जागरण मंच का प्रयास है कि देश आत्मनिर्भर बने, अर्थव्यवस्था मजबूत हो और लोग स्वदेशी वस्तुओं को अपने जीवन में अपनाएं।

उन्होंने कहा कि मेले के माध्यम से छोटे उद्योगों, महिला उद्यमियों और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाता है। नागरिकों को यह समझाना भी जरूरी है कि उनकी खरीदारी देश को मजबूत बनाने में योगदान दे सकती है। देशभक्ति का अर्थ केवल सीमा पर जाकर देश की रक्षा करना नहीं है, बल्कि अपने दैनिक जीवन में ऐसे निर्णय लेना भी है, जिनसे देश की अर्थव्यवस्था और उद्यम मजबूत हों।

विश्वकर्मा ने बताया कि देशभर में अब तक स्वदेशी जागरण मंच द्वारा लगभग 800 मेले आयोजित किए जा चुके हैं। पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में 15 मेले आयोजित किए गए थे, जबकि इस वर्ष इनकी संख्या 28 तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

मेले में 200 से अधिक स्टॉल, स्थानीय उत्पादों को मिला प्रोत्साहन

मीडिया प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि भोपाल में दूसरे वर्ष आयोजित स्वदेशी मेले में बड़ी संख्या में उद्यमियों और व्यापारियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। इस वर्ष मेले में अच्छी बिक्री हुई और उद्यमियों को प्रोत्साहन मिला। उन्होंने बताया कि देशभर में अब तक करीब 800 स्वदेशी मेले आयोजित किए जा चुके हैं। मध्य प्रदेश में पिछले वर्ष 15 मेले हुए थे और इस वर्ष यह संख्या 28 तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले समय में इन आयोजनों का विस्तार करने की योजना है।

भजन संध्या में ‘सबके राम-सबमें राम’ की संगीतमय प्रस्तुति

मेले के अंतिम दिन 4 नवंबर को सांस्कृतिक मंच पर विशेष भजन संध्या का आयोजन किया गया। इसमें देशभर में अपनी संगीतमय प्रस्तुतियों के लिए प्रसिद्ध कृष्णगोपाल पाठक ने अपनी पुत्रियों आहना कृष्ण पाठक, सुदीक्षा पाठक और श्लोका पाठक के साथ ‘सबके राम-सबमें राम’ की प्रस्तुति दी। इस दौरान प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण और भगवान शिव के भजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, मातृभूमि और पूर्वजों के गौरव का गुणगान किया गया।


स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह मेला 24 अक्टूबर से 4 नवंबर तक शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में चला। मेले में देशभर के स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्यमियों और महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और बिक्री का अवसर मिला।

कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, नर्मदापुर के संसद दर्शन सिंह चौधरी, श्रीकांत भदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी और विनय कुमार सोनी सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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