शिक्षकों को दो कौड़ी कहना अपनी गरिमा को तार तार करना

आज तक चैनल की एंकर अंजना ओम कश्यप द्वारा शिक्षकों को दो कौड़ी का कहना यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, गैर-जिम्मेदाराना और निंदनीय है उपरोक्त बयान की कड़ी निंदा करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं, दो कौड़ी के नहीं*: जो राष्ट्र-निर्माता हैं, जो कल के नागरिक गढ़ते हैं, उन्हें “दो कौड़ी का” कहना सिर्फ शिक्षकों का नहीं, पूरे शिक्षा तंत्र और भारतीय संस्कृति का अपमान है। गुरु को तो भगवान से भी ऊपर रखा गया है – “गुरु गोविंद दोऊ खड़े…”।
पत्रकारिता की मर्यादा तार-तार हुई एंकर का काम सवाल पूछना है, फैसला सुनाना नहीं। TRP के लिए सनसनी फैलाने के चक्कर में अगर कोई एंकर शिक्षकों जैसी सम्मानित संस्था पर कीचड़ उछालता है, तो यह पत्रकारिता नहीं, ‘दरबारी पत्रकारिता’ है। माइक हाथ में होने से किसी को अपमान करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष डॉ अशफाक खान शिक्षक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र चौक से नेशनल मूवमेंट के जिला अध्यक्ष अनिल बाविस्कर अजेक्स के राजस्थान में अपेक्स के राजकुमार मंडलोई नेशनल मूवमेंट के संयोजक विजय राठौड़ श्रीमती कल्पना पवार ने कहा किbमाफी और कार्रवाई जरूरी, आज तक जैसे बड़े संस्थान के एंकर से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। चैनल को तुरंत इस बयान से खुद को अलग करते हुए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए और संबंधित एंकर पर कार्रवाई करनी चाहिए।
समाज को सोचना होगा हम कैसा समाज बना रहे हैं जहां डॉक्टर, फौजी, शिक्षक – जो असल में देश चलाते हैं – उनका अपमान टीवी पर बैठकर किया जाए और हम ताली बजाएं?
असहमति हो सकती है, व्यवस्था पर सवाल हो सकते हैं, लेकिन शिक्षक समुदाय को अपशब्द कहना न सिर्फ घटिया है बल्कि लाखों शिक्षकों के मनोबल को तोड़ने वाला है। शिक्षकों के बिना कोई एंकर, कोई नेता, कोई अफसर पैदा नहीं होता।
आज तक प्रबंधन को इस पर संज्ञान लेकर उदाहरण पेश करना चाहिए ताकि कल कोई और ‘दो कौड़ी की पत्रकारिता’ न करे।



