EPS, एनपीएस से पेंशन वाले पेंशनर का हाल बेहाल

*नई पेंशन स्कीम के अंतर्गत पेंशन पाने वाला हर दूसरा पेंशनर₹1000 से भी काम में गुजारा कर रहा है महंगाई के दौर में कर्मचारी पेंशन योजना यूपीएस की हकीकत चिंता बढ़ने वाली है कर्मचारी भविष्य* निधि *संगठन के 2024 2025 के वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश के 82 लाख पेंशनरों को में से 37 लाख पेंशनर हर महीने ₹1000 से भी कम पेंशन मिल रही है यानी कि हर दूसरा पेंशनर इतनी राशि में* *गुजारा करने के लिए मजबूर है वही अमृत कर्मचारियों के बच्चों को मिलने वाली औसत पेंशन सिर्फ 641 रुपए प्रतिमाह है उपरोक्त जानकारी देते हुए कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं नेशनल मूवमेंट के *प्रांतीय संयोजक ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन पेंशन की संरचना उसी अनुपात में नहीं बदली कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक 53 लाख सदस्य पेंशनरों को औसतन 2573 पर प्रतिमा पेंशन मिल रही है एवं 22 लाख आश्रित पेंशनर को औसत पेंशन 1740 रुपए हैं जबकि 6 लाख बाल पेंशनरों को और शैतान 641 रुपए प्रतिमा पेंशन मिल रही है श्री संतोष सिंह दीक्षित का कहना है कि वर्तमान समय में शिक्षा पोषण और स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च की तुलना में यह राशि बेहद कम है संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष अशफाक खान ,धर्मेंद्र चौकसे ,अनिल बाविस्कर ,राजेश साल्वे ,बृजेश राठौर, राजेश पाटील ,अनिल सातव ,श्रीमती कल्पना पवार, श्रीमती मंजूश्री ठाकुर ने भी चिंता जाहिर करते कहा कि कम से कम कर्मचारियों को 7: 50 हजार रुपए* *औसत पेंशन मिलना चाहिए*
*2013 में होशियारी समिति ने न्यूनतम पेंशन₹3000 करने की सिफारिश की थी इस पर भी अब तक अमल नहीं हुआ अब देश भर के पेंशनर संगठन न्यूनतम पेंशन 7500हजार रुपए प्रतिमा करने की मांग कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात 1000 ₹1500 में पेंशन में क्या होने वाला है बुजुर्गों को हर महीने हजार से₹3000 तक दवाई पर खर्च हो जाते हैं हजार रुपए का सिलेंडर हो गया बिजली पानी का न्यूनतम मासिक खर्च₹1000 हो गया ऐसे में पेंशन की पूरी राशि कई बार एक जरूरी खर्च पर भी पूरा नहीं कर पाती और उसे पर से भी केंद्र सरकार द्वारा पेंशन की गणना महंगाई के अनुरूप नहीं करने के कारण सुधार नहीं होने के कारण और महंगाई राहत ऐसी व्यवस्था का अभाव इसका प्रमुख कारण है इसमें सुधार होना चाहिए संतोष सिंह दीक्षित ने मांग की है माननीय प्रधानमंत्री जी से मोदी जी से जो कर्मचारी अधिकारी देश की सारी योजना लागू करते हैं देश के विकास में सहायक है उनका बुढ़ापे में दर दर की ठोकरे खाने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए लोकतंत्र का हिस्सा है बुजुर्ग लोग उनकी भी कदर कीजिए जिन्होंने इस देश को बढ़ाने में मजबूत करने में अपना योगदान दिया है लगातार अनुविरत35 40 साल सेवा कर रहे ,दया कीजिए और 2004 से बंद पुरानी पेंशन लागू कीजिए





