बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के फार्मेसी विभाग द्वारा PM-उषा योजना के अंतर्गत 6 से 9 जनवरी 2026 तक आयोजित चार दिवसीय “फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री” कार्यशाला का आयोजन किया

फार्मेसी विभाग द्वारा PM-उषा योजना के अंतर्गत फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री पर आयोजित कार्यशाला का सफल एवं गरिमामय समापन
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के फार्मेसी विभाग द्वारा PM-उषा योजना के अंतर्गत 6 से 9 जनवरी 2026 तक आयोजित चार दिवसीय “फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री” कार्यशाला का समापन सत्र अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस कार्यशाला में 10 विभिन्न फार्मेसी संस्थानों के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
समापन सत्र का शुभारंभ डायरेक्टर एवं कार्यशाला संयोजक प्रो. रागिनी गोथलवाल द्वारा स्वागत उद्बोधन से हुआ।
उन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री के क्षेत्र में उद्योग आधारित कार्य प्रक्रियाओं से अवगत कराना था, जिसमें व्याख्यानों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया।
इसके पश्चात सुश्री दर्शना गोहाटे, सह-समन्वयक, फार्मेसी विभाग द्वारा चारों दिनों में आयोजित व्याख्यानों, प्रशिक्षण सत्रों एवं प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए सभी वक्ताओं एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. विवेक शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि केमिस्ट्री का जीवन में एक विशिष्ट और व्यापक स्थान है। यह न केवल शैक्षणिक शिक्षा का अभिन्न अंग है, बल्कि जीवन की शिक्षा (Education of Life) में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि विज्ञान को केवल विषय के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से जोड़कर समझना चाहिए।
कार्यक्रम की विशेष अतिथि प्रो. शिल्पा काओरे, फार्माकोलॉजी विभाग, AIIMS भोपाल ने अपने संबोधन में कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों के लिए केमिस्ट्री एवं विश्लेषणात्मक तकनीकों की मजबूत समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण से जोड़ती हैं और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं।
समापन सत्र में माननीय कुलपति प्रो. एस. के. जैन ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जो कुछ भी आप सीखते हैं, उसे केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखें, बल्कि उसे व्यावहारिक जीवन में प्रभावी रूप से लागू करें। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सबसे पहले एक अच्छे मानव बनने का प्रयास करें और अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभवों से आत्मसात करते हुए आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक रूप से भी सक्षम बनाना है। उन्होंने आयोजन समिति को इस सफल कार्यशाला के लिए बधाई दी तथा भविष्य में ऐसे और भी गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर PM-उषा योजना के नोडल, को-नोडल, सॉफ्ट कंपोनेंट के कोऑर्डिनेटर, विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष (HOD) एवं संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे। CRISP के सहयोग से आयोजित यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई।
प्रतिभागियों के फीडबैक सत्र में विद्यार्थियों ने बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें उद्योग की कार्यप्रणाली, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों एवं विषय की व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक समझ प्राप्त हुई है तथा वे भविष्य में इस प्रकार की अधिक अवधि की कार्यशालाओं में भी सहभागिता करना चाहेंगे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रचना अखंड गिरी, विभागाध्यक्ष एवं समन्वयक, फार्मेसी विभाग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए और कार्यशाला का सफल समापन हुआ।





