मध्य प्रदेश

सामाजिक सुरक्षा है पुरानी पेंशन

*मध्य प्रदेश कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेशनल मूवमेंट ऑफओल्ड पेंशन स्कीम के प्रांतीय संयोजक ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि पुरानी पेंशन सामाजिक सुरक्षा है आने वाले समय में यह आंदोलन जन आंदोलन का रूप ले ले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है नौकरियों में निम्न और मध्यम वर्ग की परिवार से ही लोग आते हैं कोई राजनेता और उद्योगपति के घरों के लोग सी नौकरी में नहीं आ जाते, जिस तरह से  सरकारी नौकरियों का निजीकरण किया जा रहा है और एनपीएस की व्यवस्था को जबरदस्ती थोपा जा रहा है इससे देश के ही नहीं प्रदेश के लाखों , करोdo  कर्मचारियों अधिकारियों में खास आक्रोश है इसका असर निश्चित रूप से आने वाले समय में दिखेगा संपूर्ण देशभर में 80 लाख एनपीएस  कर्मचारी और समस्त देश के कर्मचारियों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या  कई करोड़ में पहुंच जाती। प्रदेश अध्यक्ष नेशनल मूवमेंट परमान डहरिया  का कहना है कि एनपीएस धोखा है 1 जनवरी 2004 केंद्र की नौकरियों में तथा अलग-अलग तारीखों में प्रदेश की नौकरियों में पुरानी पेंशन व्यवस्था बंद कर दी गई उसे समय भी पश्चिम बंगाल ,केरल और त्रिपुरा में पुरानी पेंशन व्यवस्था जारी रही परंतु कुछ समय बाद त्रिपुरा और केरल में भी वह व्यवस्था बंद कर दी गई देश का एकमात्र राज्य पश्चिम बंगाल जहां आज भी पुरानी पेंशन लगातार जारी है जबकि अन्य जगहों पर एनपीएस लागू कर दी गई है ।एनपीएस को लागू करते समय यह बताया गया कि इस योजना में बहुत लाभ होगा परंतु अब जब परिणाम सामने आने लगे हैं किसी को एनपीएस के तहत ₹700, 1800 रुपए, 4200 पेंशन के रूप में मिल रहे हैं जो किसी भी तरह न्याय संगत नहीं है ईसी को लेकर पूरे प्रदेश ही नहीं देश के कर्मचारियों में बहुत आक्रोश है। संयुक्त मोर्चा की जिला अध्यक्ष डॉक्टर अशफाक खान का कहना है कि जैसे-जैसे पुरानी पेंशन की खूबियां और एनपीएस की कमियां लोगों को समझ में आ रही है वैसे-वैसे संपूर्ण भारत देश में पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन से कर्मचारी अधिकारी जुड़ने जा रहे हैं इसी के संघर्ष का परिणाम है कि आज गैर भाजपा शासित पांच राज्यों कर्नाटक, छत्तीसगढ़, झारखंड ,पंजाब और हिमाचल की सरकारों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को पूर्ण अपने यहां लागू कर दिया गया है और कर्मचारियों के पक्ष में वहां की सरकारी और उन राज्यों के मुख्यमंत्री जोरदार तरीके से पुराने पेंशन की सिफारिश भी कर रहे हैं और भारत सरकार से मांग कर रहे हैं कि पूरे देश में पुरानी पेंशन लागू कर दी जाए और कर्मचारियों को बुढ़ापे में बेहाल न छोड़ा जाए ।नेशनल मूवमेंट के जिला अध्यक्ष अनिल बाविस्कर का कहना है पुरानी पेंशन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है अब यह तो ना उगले जाता है ना निकल जाता है वहीं शिक्षक कांग्रेस  जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र चौकसे का कहना है कि समय-समय पर माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने पुराने पुरानी पेंशन के संबंध में कहा कि इसके कारण सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ता है तो फिर देश के माननीय को जो अपने आप को लोक सेवा करते हैं वेतन भत्ता और अन्य सुविधा की क्या जरूरत है जब उनको पुरानी पेंशन दी जा रही है तो कर्मचारी अधिकारी को देने में पक्षपात क्यों ?संयुक्त मोर्चा के अनिल सातों ,सदानंद भाई ,भानु दास भाई, बृजेश राठौर, श्रीमती प्रमिला सगरे ,कल्पना पवार, ज्योति पाटील ,राजेश पाटिल का कहना है कि माननीय केंद्र सरकार से निवेदन करते हैं 2004 से बंद पुरानी पेंशन प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता के साथ लागू किया जाए ताकि कर्मचारी बुढ़ापे में आर्थिक रूप से मोहताज न हो किसी के सहारे ना रहे जिस दिन माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने पुरानी पेंशन लागू कर देंगे उस दिन से हम सभी कर्मचारी अधिकारी मोदी जी का समर्थन सेवानिवृत्ति तक करेंगे ,मरते दम तक करेंगे पुरानी पेंशन लागू कीजिए*

Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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