आरजीपीवी का तीन भागों में विभाजन, अभाविप के सतत आंदोलन की तार्किक परिणति

मध्य प्रदेश के एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के सुचारू, पारदर्शी एवं प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को तीन भागों में विभाजित करने के कैबिनेट प्रस्ताव को स्वीकृति देना एक ऐतिहासिक एवं सुधारात्मक कदम है।
उल्लेखनीय है कि RGPV में विगत लंबे समय से व्याप्त प्रशासनिक अक्षम्यता, अकादमिक एवं आर्थिक अनियमितताओं तथा छात्रों की लगातार बढ़ती समस्याओं के विरोध में अभाविप द्वारा विश्वविद्यालय के विकेंद्रीकरण की माँग लगातार की जा रही थी।
अभाविप द्वारा विगत दो वर्षों से विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताएं एवं विकेंद्रीकरण की माँग को लेकर चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा था। अभाविप ने आंदोलन, ज्ञापन, प्रदर्शन एवं संवाद के माध्यम से शासन एवं प्रशासन के समक्ष विश्वविद्यालय एवं छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। अभाविप का मानना था कि बड़े और अत्यधिक केंद्रीकृत विश्वविद्यालय का संचालन छात्रों के हितों के अनुरूप नहीं हो सकता और केवल विश्वविद्यालय के विभाजन से ही पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी प्रशासन संभव है।
अभाविप सरकार के इस छात्रहितैषी निर्णय का सहर्ष स्वागत करती है और इसे विद्यार्थियों के अधिकारों व पारदर्शी शिक्षा प्रणाली के लिए परिषद द्वारा किए गए अपने दीर्घकालिक संघर्ष की बड़ी जीत मानती है।
अभाविप का मानना है कि त्रि-विभाजन के पश्चात गठित होने वाले नए केंद्र तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करेंगे, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देंगे विश्वविद्यालय की खोई हुई प्रशासनिक स्थिरता को पुनः स्थापित करेंगे। और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालयीय सेवाओं की पहुँच को सुगम बनाएंगे।
अभाविप मध्य भारत प्रांत के प्रांत मंत्री श्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि “राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार, अकादमिक बदहाली और प्रशासनिक अराजकता के विरुद्ध अभाविप विगत दो वर्षों से विश्वविद्यालय से लेकर शासन स्तर तक निरंतर संघर्षरत थी। अभाविप का स्पष्ट मानना था कि इतने बड़े विश्वविद्यालय का पारदर्शी संचालन केवल इसके विकेंद्रीकरण से ही संभव है।
प्रदेश सरकार द्वारा आरजीपीवी को तीन भागों में विभाजित करने का निर्णय अभाविप के न्यायोचित और रचनात्मक आंदोलन की तार्किक परिणति है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा, बल्कि प्रदेश के लाखों तकनीकी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और त्वरित समाधान उपलब्ध कराएगा। इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए अभाविप मध्य प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करती है।”
अभाविप सरकार से यह भी अपेक्षा का करती है कि विश्वविद्यालय के त्रिविभाजन के पश्चात सक्षम नेतृत्व के साथ ही अनुभवी मनुष्य बल और आर्थिक संसाधनों की भी उचित व्यवस्था बनाने हेतु योग्य कदम उठाए जाएं।





