महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय की अंकसूची एवं उपाधि की मान्यता वैद्धता की जाँच उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन के अधिकारियों विशेषकर सी सी सेल एवं शाखा 3 प्रभारी डॉ अनिल पाठक के अनुसार WP 14783/2013

उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल में पदस्थ विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डॉ अनिल पाठक जिसकी स्वयं की पीएचडी संदिग्ध है जिसकी जाँच चल रही है


के द्वारा प्रधानमंत्री जी की शिक्षा नीति सहित छात्रहित से खिलवाड़ करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री की किरकिरी करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय की अंकसूची एवं उपाधि की मान्यता वैद्धता की जाँच उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन के अधिकारियों विशेषकर सी सी सेल एवं शाखा 3 प्रभारी डॉ अनिल पाठक के अनुसार छात्रों द्वारा अंकसूची एवं उपाधि की मान्यता एवं वैद्धता की जाँच करने एवं नियमानुसार अनुमति की जाँच के संबंध में WP 14783/2013 के स्थगन आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश शासन को जाँच करने का अधिकार नहीं है ऐसा संबंधित छात्रों को जबाव देते हैं ।ठीक है मान लिया, अब उक्त संस्था की जाँच उच्च शिक्षा विभाग की क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक जबलपुर संभाग डॉ लीला भलावी ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल के आदेश उपरांत दो दो बार जाँच करते हुए भौतिक निरीक्षण एवं जाँच करते हुए जाँच प्रतिवेदन उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन की ओर भेजा, उसके बाद इसी उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल द्वारा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति की नियुक्ति की जाँच कर नियुक्ति अमान्य करने का आदेश भी जारी किया, तथा ऐसे ही AFRC के सचिव डॉ डी ए हिंडोलिया द्वारा भी संस्था की निर्धारित शुल्क निरस्त करते हुए उक्त विश्वविद्यालय की वैद्धता की जाँच संस्थित की गई, पता नहीं कौन सा नशा करके या किस मद में चूर होकर 14783/2013 का हवाला देते हैं जबकि उक्त समस्त जाँचों में संबंधित विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलसचिव अरविंद सिंह राजपूत, सहायक कुल सचिव अशोक सिंह चौहान, उपकुलसचिव बृज किशोर शुक्ला, उपकुलसचिव संदीप शर्मा, परीक्षा नियंत्रक अखिलेश जैन सहित अन्य अधिकारियों ने स्वयं उपस्थित होकर स्वयं के कथनों सहित दस्तावेजों सहित जानकारी उपलब्ध करायी परंतु किसी भी अधिकारी ने उक्त स्थगन आदेश का उल्लेख ही नहीं किया, अब ये समझ से परे है कि विश्वविद्यालय की स्थापना एवं संचालन छात्रों के लिए किया गया है अथवा अथवा काला पीला करने के लिए, प्रवेशित छात्र हजारों रुपये फीस देने के उपरांत भी अंकसूची एवं उपाधि की मान्यता की जाँच नहीं करवा सकता परंतु विश्वविद्यालय प्रबंधन को लाभ देने के लिए एवं स्वयं के हितों को साधने के लिए उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन के अधिकारियों द्वारा जाँच की जा सकती है, ये कौन सा नियम कानून है कि बीसों सालों तक स्थगन आदेश लटका के रखो और जैसा चाहो वैसा उपयोग करो। विश्वविद्यालय किसलिए संचालित है इसकी जाँच कौन से देश की जाँच एजेंसी जाँच कर सकती है उस देश और जाँच एजेंसी का नाम ही बता दो। UCC लागू करेंगे, छात्रों की एक समस्या तो हल कर नहीं पा रहे हैं।
मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ के अधिकारियों की मेहरबानी से मध्यप्रदेश में एक अजूबा विश्वविद्यालय महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय संचालित है जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा डिफाल्टर घोषित है, जिसकी अधिसूचना (Notification) स्थापना सत्र 1995 से आज दिनांक तक जारी ही नहीं की गई, जिसके कुलाधिपति की नियुक्ति विगत दो वर्ष से नहीं हुई, जिसके कुलपति / कुलगुरु की नियुक्ति नहीं हुई, नियमित कुलसचिव नियुक्ति विगत वर्षों नहीं हुई, जिसकी अंकसूची एवं उपाधि की मान्यता वैद्धता पर सत्र 2015 में तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश एवं तत्कालीन प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल द्वारा गंभीर प्रश्न चिन्ह सहित विश्वविद्यालय संचालन पर गंभीर प्रश्न लगाये तथा माननीय उच्च न्यायलय मध्य प्रदेश द्वारा भी सत्र 2014 तक की अंकसूची मान्य के आदेश दिये गये हैं । परंतु वर्तमान में उक्त समस्त अनियमितताएं अनदेखी करते हुए वर्तमान सी सी सी सेल एवं शाखा 3 प्रभारी सहित सभी उच्च अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर छात्र हित से खिलवाड़ करते हुए कहीं फर्जी अंकसूची व्यापार तो नहीं करवा रहे।



