मध्य प्रदेश

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित बालिका सुरक्षा सृजन महासम्मेलन



सम्‍मेलन में सुरक्षित, शिक्षित एवं बाल श्रम मुक्त समाज निर्माण का लिया संकल्प
सामुदायिक पुलिस की पहल पर बच्चों, प्रशासन एवं सामाजिक संगठनों की सहभागिता से हुआ प्रेरणादायी आयोजन
किशोर स्वास्थ्य, मानसिक सशक्तिकरण, बाल अधिकार, कौशल विकास एवं सुरक्षित जीवनशैली पर हुआ व्यापक


भोपाल, 12 जून 2026- विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर ज्ञान-विज्ञान भवन, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित “बालिका सुरक्षा सृजन महासम्मेलन” बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास एवं बाल श्रम उन्मूलन के प्रति जन-जागरूकता का प्रभावशाली मंच बनकर उभरा। सामुदायिक पुलिसिंग प्रकोष्ठ, श्रम विभाग, यूनिसेफ, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज एवं विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों तथा बच्चों ने संकल्प लिया कि प्रदेश का प्रत्येक बच्चा शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान एवं अवसरों से जुड़ा रहे तथा बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई के उन्मूलन हेतु सामूहिक प्रयासों को और अधिक सशक्त बनाया जाए।
महासम्मेलन में भोपाल शहर के विभिन्न क्षेत्रों से चयनित लगभग 600 से अधिक बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इनमें ऐसे बच्चे भी शामिल थे जो सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से संवेदनशील परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे हैं अथवा मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया में हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना, शिक्षा से जोड़ना, आत्मविश्वास विकसित करना तथा बाल श्रम, बाल विवाह, मानव तस्करी, साइबर अपराध एवं अन्य सामाजिक जोखिमों के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर सहायक पुलिस महानिरीक्षक सामुदायिक पुलिसिंग श्री अमृत मीना, आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधिगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति डॉ. विवेक शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम पुलिस और समाज के बीच बढ़ते विश्वास का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज पुलिस केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं एवं बच्चों के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बालिकाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने, आत्मनिर्भर बनने तथा अपने सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।
*पुलिस आयुक्‍त ने किया व्‍यापक बाल संवाद*
पुलिस आयुक्त श्री संजय कुमार ने कहा कि पुलिस और समाज की साझेदारी ही सुरक्षित एवं सशक्त समुदाय के निर्माण का आधार है तथा सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से प्राप्त छोटी-छोटी जानकारियां भी कई बार बड़े अपराधों की रोकथाम और महत्वपूर्ण मामलों के खुलासे में सहायक सिद्ध होती हैं। उन्होंने बच्चों, अभिभावकों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि, नशे के अवैध कारोबार, अवैध हथियारों के उपयोग, मानव तस्करी, बाल अपराध अथवा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की सूचना निसंकोच पुलिस तक पहुंचाएं। उन्होंने विशेष संपर्क नंबर 7587648300 तथा क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।
उन्होंने कार्यक्रम के दौरान प्राप्त सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन देते हुए स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका की सराहना की और कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज के साथ मिलकर अपराधों की रोकथाम, बच्चों की सुरक्षा, युवाओं को सही दिशा प्रदान करना और नागरिकों में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करना भी है। उन्होंने बच्चों से शिक्षा, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
*बाल श्रम उन्मूलन पर श्रम विभाग व सामुदायिक पुलिस का गठजोड़*
कार्यक्रम में श्रम विभाग के सचिव श्री रघुराज राजेन्द्रन ने बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें अपने सपनों एवं भविष्य के बारे में खुलकर बोलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की जानकारी देते हुए कहा कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से श्रम कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम केवल कार्य कराने का विषय नहीं, बल्कि बच्चों के बचपन, शिक्षा एवं समग्र विकास से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि यदि उनके आसपास कोई बच्चा विद्यालय छोड़ रहा हो अथवा श्रम करने को विवश हो तो इसकी सूचना संबंधित विभागों तक अवश्य पहुँचाएँ।
इस अवसर पर सामुदायिक पुलिसिंग प्रकोष्ठ के पुलिस उप महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने कहा कि “सृजन” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य निर्माण का व्यापक सामाजिक अभियान है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक पुलिसिंग के अंतर्गत ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाता है जो विद्यालय छोड़ चुके हैं अथवा सामाजिक जोखिमों से प्रभावित हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 से संचालित “सृजन” कार्यक्रम के अंतर्गत 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से बच्चों को बाल अधिकार, कानून, आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता एवं जीवन कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में विकसित हुआ आत्मविश्वास इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ श्री लोली चेन ने कहा कि बाल श्रम केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों एवं उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ मध्यप्रदेश शासन के साथ मिलकर बाल श्रम उन्मूलन, विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, पुनर्वास एवं पुनः नामांकन की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों तक पहुँचने एवं उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक श्री अमिताभ अवस्थी ने कहा कि जब किसी बच्चे के हाथों में किताबों के स्थान पर श्रम के उपकरण दिखाई देते हैं तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे का स्थान ढाबे, होटल, कारखाने या कार्यस्थल पर नहीं बल्कि विद्यालय में होना चाहिए।
*स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं जीवन कौशल पर विशेषज्ञों ने किया मार्गदर्शन व बाल स्‍वास्‍थ्‍य शिविर*
कार्यक्रम में आयोजित विशेष स्वास्थ्य एवं जागरूकता सत्र में किशोर स्वास्थ्य, मानसिक सशक्तिकरण, व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण, नशामुक्ति, डिजिटल सुरक्षा एवं जीवन कौशल जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने बच्चों से संवाद किया।
आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. शालिनी कपूर ने बच्चों को शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य के महत्व से अवगत कराते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
पीडियाट्रिशियन डॉ. दीपाली मालवीय ने किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तनों, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग, खेलकूद एवं सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर अपराधों से बचाव तथा ऑनलाइन सुरक्षा के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
बालिकाओं के लिए आयोजित विशेष संवाद में मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) पर वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। विशेषज्ञों ने इससे जुड़े मिथकों को दूर करते हुए इसे एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया बताया तथा बालकों को भी इस विषय के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगी बनने का संदेश दिया।
*बच्चों ने रखे आत्मविश्वास के साथ अपने विचार*
महासम्मेलन का सबसे प्रेरणादायी भाग बच्चों के साथ आयोजित खुला संवाद रहा, जिसमें बच्चों ने शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, करियर निर्माण एवं आत्मनिर्भरता से जुड़े प्रश्न पूछे। वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने बच्चों को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। सामुदायिक पुलिस प्रभावों के कारण सृजन अभियान के योगदान में भोपाल की 15 बस्तियों में संचालित सृजन शिविरों से बच्चों में सामुदायिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।
कार्यक्रम में बच्चों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों एवं आत्मविश्वास ने सभी अतिथियों को प्रभावित किया। अधिकारियों ने कहा कि जिन बच्चों में कभी सार्वजनिक मंच पर बोलने का आत्मविश्वास नहीं था, वे आज वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों एवं विभागीय प्रमुखों के समक्ष निडर होकर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं, जो “सृजन” कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कार्यक्रम का समापन मध्यप्रदेश पुलिस की म्युजिकल प्रस्तुति “हम होंगे कामयाब” के साथ हुआ। इसके उपरांत बच्चों के लिए सांस्कृतिक, संगीत एवं मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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