मध्य प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने प्रदेश सरकार की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सवाल उठाए

मध्य प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने प्रदेश सरकार की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के नाम पर डराया गया और अब 90% उपस्थिति पूरी न होने पर निलंबन जैसे आदेश जारी किए जा रहे हैं।
संयुक्त मोर्चा के अशफाक खान, धर्मेंद्र चौक से ,अनिल बाविस्कर, राजेश साल्वे , विजय राठौर, राजेश पाटील, कल्पना पवार ने कहा कि शिक्षक समाज और देश के भविष्य के निर्माता हैं। सरकार का दायित्व है कि वह शिक्षकों का सम्मान करे और उन्हें शिक्षा व्यवस्था से आत्मीय रूप से जोड़े, न कि तानाशाही रवैया अपनाए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा-
“कोई विधि का विधान करो, लेकिन शिक्षक का सम्मान करो। इस तरह की तानाशाही से नहीं, सम्मान और विश्वास से शिक्षा का उत्थान करो। ई-अटेंडेंस को लेकर सरकार पर बरसे बोले- ‘शिक्षकों को डराना नहीं, सम्मान देना चाहिए’
मध्य प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने प्रदेश सरकार की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिक्षकों को ई-अटेंडेंस के नाम पर डराया गया और अब 90% उपस्थिति पूरी न होने पर निलंबन जैसे आदेश जारी किए जा रहे हैं।लेकिन शिक्षकऑनलाइन उपस्थिति लगाने की कोशिश में हमारे 2 शिक्षक साथी हुए दुर्घटना का शिकार*
शासकीय प्राथमिक शाला सुरू
संकुल केंद्र मालथोन , विकासखंड – मालथोन, जिला सागर , मध्य प्रदेश राज्यपाल , मुख्यमंत्री एवं स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया जाता है। ऐसे में नेटवर्क की समस्या, मोबाइल की तकनीकी खराबी, इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली की अनुपलब्धता अथवा ऐप संबंधी त्रुटियों के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं होने पर शिक्षकों को दोषी मानना उनके सम्मान के विपरीत है। इस प्रकार के विभाग द्वारा किए जा रहे व्यवहार का संगठन विरोध करेगा !
मोर्चा ने शासन से मांग की है कि विद्यालयों में पर्याप्त नेटवर्क, बिजली एवं तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना ई-अटेंडेंस को वेतन से नहीं जोड़ा जाए। साथ ही ऑफलाइन उपस्थिति को भी वैध माना जाए तथा आपातकालीन परिस्थितियों में संस्था प्रमुख द्वारा उपस्थिति प्रमाणित करने की व्यवस्था लागू की जाए।
दीक्षित ने यह भी मांग की है कि ई-अटेंडेंस कीई-अटेंडेंस को लेकर सरकार पर बरसे बोले- ‘शिक्षकों को डराना नहीं, सम्मान देना चाहिए’
व्यवस्था केवल स्कूल शिक्षा विभाग तक सीमित न रहकर प्रदेश के सभी विभागों में समान रूप से लागू की जाए। शिक्षकों के वेतन को ई-अटेंडेंस से जोड़कर उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
मोर्चा ने माननीय शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह से आग्रह किया है कि प्रदेश के शिक्षकों में व्याप्त असंतोष एवं भय को समाप्त करने के लिए संबंधित आदेशों को तत्काल स्थगित एवं निरस्त किया जाए, ताकि शिक्षक निर्भय होकर पूर्ण समर्पण के साथ अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।




