बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में “शोध में भारतीयता” विषय पर सारगर्भित परिचर्चा आयोजित

भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल एवं प्रज्ञा विमर्श न्यास के संयुक्त तत्वावधान में “शोध में भारतीयता” विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय चिंतन एवं भारतीय जीवन-दृष्टि को शोध के केंद्र में स्थापित करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शोध की नई दिशाओं पर गंभीर विमर्श करना था।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सदानंद दामोदर सप्रे, केंद्रीय टोली सदस्य प्रज्ञा प्रवाह ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि समकालीन शोध के लिए एक सशक्त बौद्धिक आधार है। उन्होंने कहा कि भारतीयता आधारित शोध समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे भारतीय दर्शन, संस्कृति, परंपराओं, लोकज्ञान एवं जीवन मूल्यों को आधुनिक शोध पद्धतियों के साथ समन्वित करते हुए मौलिक एवं समाजोपयोगी अनुसंधान करें।
विशिष्ट वक्ता श्री धीरेंद्र चतुर्वेदी, प्रांत संयोजक, मध्य भारत प्रांत ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित शोध ही वैश्विक स्तर पर भारत की ज्ञान परंपरा को नई पहचान प्रदान कर सकता है। उन्होंने भारतीय चिंतन को शोध की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रोफेसर विवेक शर्मा ने कहा कि शिक्षा मूल उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा एवं अनुसंधान का अभिन्न अंग बनाना है। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भारतीयता आधारित शोध को प्रोत्साहित करने तथा शोधार्थियों में भारतीय दृष्टि विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. पवन मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन शोध के मध्य समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. आर.के. गर्ग का विशेष सहयोग रहा।
अंत में कुलसचिव डॉ. समर बहादुर सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रज्ञा विमर्श न्यास के पदाधिकारियों, शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की परिचर्चाएँ भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित गुणवत्तापूर्ण शोध को नई दिशा प्रदान करेंगी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा शोध में भारतीयता के विभिन्न आयामों पर गंभीर चर्चा की।





