PWD में प्रमोशन फाइलों में कथित गड़बड़ी, अनुभाग अधिकारी पर बड़ी कार्रवाई
भोपाल-मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग यानी PWD में इंजीनियरों की पदोन्नति से जुड़ी फाइलों में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में PWD के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने अनुभाग अधिकारी दयानंद उपाध्याय को एकतरफा कार्यमुक्त करते हुए उनकी सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग यानी GAD को सौंप दी हैं।
मामला इंजीनियरों की विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC के लिए तैयार किए गए दस्तावेजों और गोपनीय चरित्रावली यानी CR से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि पदोन्नति के लिए तैयार कुछ फोल्डरों में महत्वपूर्ण जानकारियां सही तरीके से शामिल नहीं की गईं।
AE से EE और SE से CE की फाइलों पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, सहायक अभियंता यानी AE से कार्यपालन अभियंता यानी EE और अधीक्षण अभियंता यानी SE से मुख्य अभियंता यानी CE की पदोन्नति से संबंधित फाइलों में गड़बड़ियां सामने आई हैं। AE से EE की पदोन्नति के लिए तैयार कुछ फोल्डरों में अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की जानकारी कथित तौर पर दर्ज नहीं की गई।
वहीं, SE से CE की DPC के दौरान एक अधिकारी की मूल CR और DPC के लिए भेजे गए फोल्डर में अंतर सामने आया। जानकारी के अनुसार, मूल CR में दर्ज ‘क’ श्रेणी को फोल्डर में कथित तौर पर ‘क प्लस’ दर्शाया गया था। रिकॉर्ड में अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
तत्कालीन मुख्य सचिव ने लौटाए थे फोल्डर
DPC के दौरान जब दस्तावेजों में अंतर का मामला तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन के संज्ञान में आया, तो उन्होंने संबंधित फोल्डर वापस लौटाने के निर्देश दिए। साथ ही रिकॉर्ड का दोबारा और गहन परीक्षण कराने को कहा गया।
DPC प्रक्रिया में अधिकारियों की पिछले पांच वर्षों की CR समेत विभागीय जांच और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जानकारी का परीक्षण किया जाता है। ऐसे में रिकॉर्ड में कथित अंतर सामने आने के बाद पदोन्नति प्रक्रिया पर भी ब्रेक लग गया।
23 पदों की पदोन्नति प्रक्रिया अटकी
SE से CE के 23 पदों के लिए DPC प्रस्तावित थी। इसमें विभाग के 21 अधीक्षण अभियंताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। लेकिन दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद फिलहाल पूरी प्रक्रिया रोक दी गई है।
अब विभागीय स्तर पर संबंधित रिकॉर्ड और DPC फोल्डरों की दोबारा जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
इधर, अनुभाग अधिकारी दयानंद उपाध्याय को PWD से हटाकर GAD को सेवाएं सौंपे जाने की कार्रवाई को भी इसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, दस्तावेजों में कथित हेरफेर के लिए कौन जिम्मेदार है, यह विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
PWD में इंजीनियरों की पदोन्नति का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रमोशन का सीधा असर अधिकारियों की वरिष्ठता, जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति पर पड़ता है। ऐसे में CR और विभागीय जांच से जुड़ी जानकारी में कथित बदलाव ने पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऐसा pwd विभाग अकेला नहीं है और भी ऐसे कई विभाग है जल्द उनका भी खुलासा किया जायेगा



