मध्य प्रदेश

पेंशन जारी ना करने पर अवमानना प्रकरण में पी एस हायर एजुकेशन ,कुलगुरु , कुलसचिव तथा संचालक पेंशन को व्यक्तिगत रूप से उच्च न्यायालय में तलब


बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संचालक शारीरिक शिक्षा के पद से सेवानिवृत डॉ अखिलेश कुमार शर्मा को पेंशन तथा एनी सेवानिवृत्ति लाभ माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत भी ना देने पर डॉ शर्मा द्वारा उच्च न्यायालय में दायर अवमानना के प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के माननीय दीपक खोट की अदालत ने सभी रिस्पांडेंट को आगामी पेशी में दिनांक 18/11/26 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए है ।
ज्ञातव्य है कि पिटीशनर डॉ अखिलेश शर्मा  को विश्वविद्यालय ने 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर दिनांक 31/3/23 को सेवानिवृत्ति कर दिया था

              डॉ शर्मा ने अधिवार्षिकी आयु पूर्ण करने पर सेवानिवृत्ति करने की आयु सीमा को यह तर्क देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर किया था कि वे संचालक पदनाम पर विगत 28  वर्षों से स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शिक्षण का कार्य कर रहे है अतः शासन के मूलभूत नियम की 20 वर्ष से अधिक शिक्षण कार्य करने पर शिक्षक के समकक्ष सभी सुविधा प्राप्त होंगी इस लिहाज से सेवानिवृत आयु 65 वर्ष होना चाहिए यह प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में 2023 से w p no 6143/2023  चल रहा है।
डॉ शर्मा को जब सेवानिवृत्ति किया गया तो डॉ शर्मा ने बार बार प्राविधिक पेंशन की मांग की पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोर्ट केस का हवाला देते हुए पेंशन आदि नहीं प्रदान की l परेशान होकर वादी द्वारा प्रकरण में इंटरिम रिलीफ हेतु आवेदन दिया जिसपर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा आवेदन क्र 4257/2025 पर आदेश दिया की वादी को 90 दिवस में पेंशन तथा समस्त सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाए,
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर कोई कार्यवाही नहीं होने पर वादी द्वारा जुलाई में अवमानना का प्रकरण दायर किया गया जिसके नोटिस के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ तथा उच्च शिक्षा संचालनालय की पेंशन शाखा की ओएसडी पूर्णिमा लोथवाल द्वारा दिनांक 29/09/26 को FR जारी कर आगामी कार्यवाही हेतु बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को भेजा गया l
सूचना मिलने पर भी जब 20 october तक विश्वविद्यालय में इस पत्र पर कोई हलचल नहीं दिखी तो एक कर्मचारी द्वारा सुविधा शुल्क की माँग की गई की जब तक यह शुल्क नहीं मिलेगा कुछ नहीं होगा
21/10/26 को सुविधा शुल्क देने के बाद भी 27 तक कोई कार्यवाही नहीं हुई l
तभी दिनांक 28/10/26 को प्रकरण उच्च न्यायालय में लिस्ट हो गया तब अचानक एफआर का पत्र विश्वविद्यालय में प्रकट हो गया जिस पर ओएसडी डॉ पूर्णिमा लोथवाल के डिजिटल हस्ताक्षर स्पष्ट रूप से दिनांक 29/09/26  को दिखायी दे रहे है l
बड़ा सवाल ये है की क्या प्रशासन इतना कमज़ोर है की अधिकारी के हस्ताक्षर के बाद भी भ्रष्टाचार के लिए आदेश को रोका जा सकता है यदि हां तो  कहाँ रोका गया संचालनालय में या विश्वविद्यालय में
डॉ लोथवाल का कथन है की मैंने तो स्वयं उसी दिन कुलसचिव को मेल कर दिया था
पत्र जहाँ भी रुका हो उच्च न्यायालय की अवमानना में श्री अनुपम राजन ,कुलगुरु आदि को 18/11/26 को उच्च न्यायालय ने इन parson उपस्थिति होने के आदेश जारी किये जो एक बड़ी घटना है l देखना है ये अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के भ्रष्टाचार पर कोई कार्यवाही करते हैं की नहीं l l
हालांकि उच्च न्यायालय द्वारा आवनाना की इस कार्यवाही से यूनिवर्सिटी के बहुत से लोग प्रसन्न है की हमलोगों द्वारा दायर अवमानना प्रकरण में भी कार्यवाही होगी l यहाँ यह बताना भी उचित होगा की यूनिवर्सिटी पर अन्य 5  अवमानना प्रकरण दायर है , जो कि भ्रष्टाचार के कारण दायर हुए भ्रष्टाचारी शासन प्रशासन में अभी भी मस्त हैं और गाज़ गिरी अधिकारियों पर

Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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