ओवान ने किया चिंकारा का शिकार, वन विभाग ने बढ़ाई सुरक्षा,
आशा ने कूनो के बाहर की चहलकदमी

ओवान ने किया चिंकारा का शिकार, वन विभाग ने बढ़ाई सुरक्षा
आशा ने कूनो के बाहर की चहलकदमी,
कूनो नेशनल पार्क में मौजूद नर और मादा चीता ओवान और आशा अब जंगल की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। वन विभाग लगातार नजर बनाया हुआ है
नर चीता ओवान के बाद अब मादा चीता आशा भी शिकार के लिए नेशनल पार्क से बाहर निकल चुकी है। उसे वीरपुर-विजयपुर इलाके में ट्रेस किया गया है और दो-तीन दिन में उसे कई बार बफर जोन वाले जंगल और आसपास के खेतों में स्पॉट किया गया है।
माता चीता आशा अधिकतर वक्त नदी के आसपास गुजार रही है और वन अमला ओवान और मादा चीता पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए हैं। इनकी चहलकदमी को बढ़ता देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम भी बढ़ा दिए गए हैं और शिकारियों से इनकी रक्षा करने के लिए ट्रेंड डॉग की तैनाती कर दी गई है
कूनो से निकले इन दोनों चीतों के बीच की दूरी अभी 40 किलोमीटर बनी हुई है। आशा फिलहाल धौरेट सरकार के जंगल में है और ओवान की लोकेशन शिवपुरी के पोहरी क्षेत्र के जंगलों में मिल रही है। ओवान को पहली बार झार बड़ौदा गांव में देखा गया था और आशा अभी यहां से 9 किलोमीटर दूर है।
रिहायशी इलाके में हो सकती है एंट्री
बताया जा रहा है कि नर चीता की लोकेशन शिवपुरी के जंगल से सटे पोहरी इलाके के सुमेड बैचाई गांव के पास मिल रही है। कूनो से निकलने के बाद सबसे पहले उसे विजयपुर के झार बडौद और फिर पार्वती बडौद के आसपास देखा गया था।
मंगलवार को वह विजयपुर के नहाड शिलपुरा में रहा और शाम को अगरा वन रेंज के जंगल वापस पहुंच गया था। फिलहाल वह कूनो के रिजर्व जोन में नहीं पहुंचा है इसलिए ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि वह एक बार फिर रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच सकता है। उसकी गर्दन में रेडियो कॉलर लगा है जिससे हर पल उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है।
इस समय कूनो और इसके आसपास के इलाके में अधिकतम तापमान 33 डिग्री तक देखा जा रहा है। ऐसे में अगर चीते ज्यादा समय तक भूखे प्यासे रहेंगे तो उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में उन्हें हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन का खतरा है लेकिन कूनो से लगातार चार दिन बाहर रहकर ओवान ने ये साबित कर दिया है कि वो किसी भी परिवेश में अपने दम पर रह सकता है। वहीं अब वन अमले की नजर आशा पर है।
नेशनल पार्क कूनो के रिहायशी इलाके में लगातार चीते देखे जा रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोगों ने खेतों की ओर जाना बंद कर दिया है। उन्होंने मांग की है कि इन्हें सेंचुरी में ही रोका जाए और प्रशासन और सरकार जल्द से जल्द इंतजाम करें ताकि ग्रामीण सुरक्षित रह सके। वहीं वन विभाग के अफसर ग्रामीणों को समझाइश दे रहे हैं और बता रहे हैं कि इंसानों को चीतों से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह इंसानों का शिकार नहीं करते हैं।



