दिग्विजय सिंह ने लिखा डॉ. मोहन यादव को पत्र,बालाघाट जिले में बच्चों की मौत के मामले को लेकरअडोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका गांवों में अब तक 1 से 13 साल की उम्र के 6 बच्चों की मौत

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के चार बैगा आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों के लगातार बीमार पड़ने से स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अडोरी, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका गांवों में अब तक 1 से 13 साल की उम्र के 6 बच्चों की मौत हो चुकी है। मामला सामने आने के बाद जबलपुर मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम प्रभावित इलाकों में पहुंची और बीमारी की वजह तलाशने के लिए जांच शुरू की।
बच्चों में दिखे गंभीर लक्षण
बीमार बच्चों में शुरूआत से ही कई तरह के लक्षण सामने आए। शरीर पर दाने निकलने के साथ बुखार, मुंह में छाले, भूख न लगना और झटके आने जैसी शिकायतें मिलीं। बच्चों की हालत और लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए बीमारी की सटीक पहचान के लिए सैंपल पुणे की लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के वास्तविक कारण और संक्रमण की स्थिति को लेकर तस्वीर साफ होगी।
विशेषज्ञों ने पोषण और पानी पर चिंता जताई
जबलपुर मेडिकल कॉलेज के महामारी एक्सपर्ट डॉ रविंद्र विश्नोई के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम ने प्रभावित गांवों का जायजा लिया। टीम के शुरूआती आकलन में बच्चों में पोषण की कमी और दूषित पानी को बीमारी की प्रमुख वजह माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई और संक्रमण का असर गंभीर हो सकता है। हालांकि अंतिम पुष्टि के लिए लैब रिपोर्ट का इंतजार है।
अस्पताल में भर्ती 47 बच्चे
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने के साथ अस्थायी अस्पताल भी शुरू किए हैं। फिलहाल 47 बच्चे बैहर औरबालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उपचार के बाद 51 बच्चों की हाला में सुधार हुआ है। साथ ही उनको अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। स्वास्थ्य टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों और ग्रामीणों की जांच कर रही है।
विशेषज्ञ टीम 23 दिन में दूसरी बार पहुंची
जबलपुर मेडिकल कॉलेज की टीम बीते 23 दिनों में दूसरी बार बालाघाट पहुंची है। 6 बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने के बाद विशेषज्ञों की लगातार निगरानी को अहम माना जा रहा है। वहीं, बैगा आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों के कुपोषण की स्थिति ने सरकारी पोषण योजनाओं के असर को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। शासन की विभिन्न योजनाओं और बड़े बजट के बावजूद बच्चों में पोषण की कमी सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासन ने भेजी विस्तृत रिपोर्ट
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ परेश उपलप ने छह बच्चों की मौत की पुष्टि की है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट भोपाल भेज दी है। प्रभावित गांवों में शिविर और अस्थायी अस्पतालों के जरिए इलाज जारी है। अब पुणे भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट पर नजर है। इसी के आधार पर बीमारी की सटीक वजह और आगे की स्वास्थ्य रणनीति को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट होगी।





