मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश के लाखों शिक्षकों के हित में टी.ई.टी. अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह जी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को लिखा पत्र

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह जी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को एक पत्र लिखकर प्रदेश के शासकीय स्कूलों में कार्यरत दो लाख से अधिक शिक्षकों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने आग्रह किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के संदर्भ में राज्य सरकार को रिव्यू पिटिशन या क्यूरेटिव पिटिशन दायर कर टी.ई.टी. अनिवार्यता को भूतलक्षी (Retrospective) के बजाय भविष्यलक्षी (Prospective) प्रभाव से लागू कराने की मांग करनी चाहिए।

श्री सिंह ने लिखा कि वर्ष 2009 में केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया था, जिसे मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल 2010 से लागू किया गया। इसके पालन में सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र से संबंधित सिविल अपील क्रमांक 1385/2025, 1386/2025 एवं अन्य मामलों में निर्णय देते हुए सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों के लिए टी.ई.टी. परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है। हालांकि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पाँच वर्ष शेष हैं, उन्हें छूट प्रदान की गई है। परीक्षा में असफल रहने पर सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

पूर्व सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन के शिक्षा विभाग द्वारा मार्च 2026 में जारी आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को टी.ई.टी. परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में संभावित है। इस आदेश के बाद से स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग के दो लाख से अधिक शिक्षकों में गहरी चिंता व्याप्त है। 25–30 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए सेवा के अंतिम चरण में इस प्रकार की परीक्षा अनिवार्यता को अनुचित बताया गया है। असफलता की स्थिति में हजारों शिक्षकों की आजीविका संकट में पड़ सकती है तथा उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। साथ ही 40–50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए इस प्रकार की परीक्षा की अनिवार्यता को भी न्यायसंगत नहीं माना गया है।

दिग्विजय सिंह जी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि प्रभावित शिक्षक संगठनों के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दायर करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। दिग्विजय सिंह ने सुझाव दिया है कि राज्य सरकार स्वयं शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में रखे, जिससे शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलेगी और सरकार के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा।

उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में विगत 25 वर्षों से व्यापम के माध्यम से मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया अपनाई जा रही है। शिक्षक आवश्यक शैक्षणिक योग्यताएं जैसे बी.एड. उत्तीर्ण कर चुके हैं। शिक्षकों के निरंतर प्रयासों से प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिसका प्रमाण बेहतर परीक्षा परिणाम और हाल ही में 62 छात्रों का यू.पी.एस.सी. में चयन है।

पत्र में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी उठाया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय महाराष्ट्र राज्य से संबंधित था और मध्यप्रदेश इस मामले में पक्षकार नहीं था। इसके बावजूद राज्य में इसे लागू कर दिया गया। जबकि मध्यप्रदेश में पहले से ही व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से टी.ई.टी. के समान कठोर परीक्षा प्रणाली लागू है, जिसके आधार पर वर्ग 1, 2 एवं 3 के शिक्षकों की नियुक्ति की जाती रही है।

दिग्विजय सिंह जी ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पिटिशन या क्यूरेटिव पिटिशन दायर कर निम्नलिखित बिंदुओं पर अपना पक्ष रखना चाहिए:

  1. पूर्व में नियुक्त सभी शिक्षक मेरिट के आधार पर चयनित किए गए हैं।
  2. शिक्षकों ने वर्षों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की है, जिसके सकारात्मक परिणाम उपलब्ध हैं।
  3. शिक्षा का अधिकार कानून 2009 को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करना न्यायोचित नहीं है।
  4. इसे राज्य में लागू होने की तिथि से प्रभावशील माना जाना चाहिए।
  5. संबंधित निर्णय महाराष्ट्र राज्य से संबंधित था, मध्यप्रदेश पक्षकार नहीं था।
  6. मध्यप्रदेश में पहले से ही टी.ई.टी. जैसी प्रभावी परीक्षा प्रणाली लागू है।
  7. मेरिट आधारित भर्ती के कारण प्रदेश के शिक्षकों को टी.ई.टी. से छूट दी जानी चाहिए।
  8. राज्य सरकार स्वयं शिक्षकों का पक्ष न्यायालय में प्रस्तुत करे।
  9. न्यायालय में अंतिम निर्णय आने तक टी.ई.टी. परीक्षा की अनिवार्यता स्थगित की जाए।

दिग्विजय सिंह जी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से आग्रह किया है कि प्रदेश के लाखों शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु शीघ्र आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं तथा टी.ई.टी. की अनिवार्यता को भूतलक्षी प्रभाव से मुक्त किया जाए।

Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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