शासकीय महाविद्यालयों में एक किस्त में पूरा शुल्क जमा करने के कारण छात्र/छात्राएं अशासकीय महाविद्यालयों, विश्वविद्यालय में जाने को मजबूर

मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रवेश प्रक्रिया आनलाइन साफ्टवेयर द्वारा संचालित किया जाता है
जिसमें सम्पूर्ण शुल्क दो या तीन किस्तों में जमा करने का प्रावधान किया जाता रहा है। जिसके आधार पर ही शासकीय महाविद्यालयों में स्नातक द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्र छात्राओं से दो किस्त में शुल्क लिया जा रहा है।लेकिन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-2027 के प्रथम वर्ष/ सेमेस्टर का सम्पूर्ण शुल्क एक साथ जमा करने के लिए साफ्टवेयर में लाक कर दिया गया है।
दो या तीन किस्त का आप्शन नहीं होने से छात्र छात्राएं मजबूरी में अशासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों द्वारा मात्र रू 100/ में प्रवेश और छात्रवृत्ति दे देना के लिये मिल रहा आप्शन के कारण छोड़ रहे है। अब यह देखना है कि विभाग अशासकीय महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को प्रमोट करने के लिए यह नुस्खा तो नही अपनाया है अन्यथा द्वितीय एवं तृतीय वर्ष जैसे ही प्रथम वर्ष का शुल्क दो किस्तों में लेने का आदेश जारी करेगा..
यह भी सुनने में आ रहा है कि शासन एक तरफ ड्रॉप आऊट के लिए गांव गांव भटक रहा है तो दूसरी ओर ओएसडी प्रवेश के काले गुजारियो के कारण छात्र छात्राएं शासकीय महाविद्यालयों छोड़ने को मजबूर कर दिये गये है…
इस संबंध में डॉ देवेन्द्र धाकड़,
(यूरोलॉजिस्ट)कार्यकारी अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ, मध्य प्रदेश कांग्रेस द्वारा विभाग को समस्या समाधान हेतु पत्र दिया गया है।




