राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मंत्री इंदर सिंह परमार ने आज बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल,वर्ष 2026 के दीक्षांत समारोह 85 शोधार्थियों को पीचडी की उपाधि 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक दिया

राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मंत्री इंदर सिंह परमार ने उपाधिधारकों को दी शुभकामनाएं
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 85 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि, 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक
भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल का वर्ष 2026 का दीक्षांत समारोह शुक्रवार, 18 सितंबर को कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने की। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग के मंत्री श्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि तथा भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति प्रो. के. रंगराजन मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के कुलगुरु एवं मध्यप्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन ने उपाधिधारकों को दीक्षांत उपदेश एवं शपथ दिलाई।
समारोह का शुभारंभ भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ। इसके बाद कुलाधिपति की अनुमति से दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ समारोह की विधिवत शुरुआत हुई। कुलगुरु श्री अनुपम राजन ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्मारिका तथा प्रो. मोना पुरोहित द्वारा लिखित पुस्तक ‘न्यायिक प्रक्रिया’ का विमोचन किया गया।
ज्ञान का उपयोग राष्ट्र और समाज के हित में करें : अनुपम राजन
कुलगुरु श्री अनुपम राजन ने उपाधिधारकों को दीक्षांत उपदेश देते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन में ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ के मूल्यों को आत्मसात करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने माता-पिता और आचार्यों का सम्मान करने, अनुशासन का पालन करने तथा विश्वविद्यालय से अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धियां केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को विकसित होते देखना सुखद : प्रो. रंगराजन
मुख्य वक्ता प्रो. के. रंगराजन ने सभी उपाधिधारकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय उनकी कर्मभूमि रहा है और विश्वविद्यालय को निरंतर विकसित होते हुए देखना उनके लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों की विशेष सराहना की। छात्राओं द्वारा बड़ी संख्या में स्वर्ण पदक प्राप्त करने को उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।
छात्राओं की बढ़ती भागीदारी सकारात्मक संकेत : इंदर सिंह परमार
विशिष्ट अतिथि एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने उपाधिधारकों एवं स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे कार्यों को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में उच्च शिक्षा में छात्राओं की प्रवेश संख्या छात्रों से अधिक होना एक सकारात्मक संकेत है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
ग्रीन एनर्जी, जल संरक्षण और विकसित भारत के लिए विश्वविद्यालय निभाए सक्रिय भूमिका : मंगुभाई पटेल
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने सभी उपाधिधारकों एवं स्वर्ण पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्ला के नाम पर है और विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के भावी विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने ग्रीन एनर्जी एवं विकसित भारत की दिशा में विश्वविद्यालय को और अधिक सक्रियता से कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा के वैकल्पिक एवं नवीकरणीय स्रोतों के उपयोग तथा सतत विकास की दिशा में अपने प्रयासों को और व्यापक बनाना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से जल संरक्षण एवं जल संसाधनों के संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित ऐसे पाठ्यक्रम एवं शैक्षणिक कार्यक्रम, जो जल, पर्यावरण, जैव विविधता एवं प्राकृतिक संसाधनों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, उन्हें शोध, नवाचार एवं जन-जागरूकता की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय को स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के प्रभावी मॉडल विकसित करने तथा विद्यार्थियों एवं समाज की सहभागिता से इस दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
कुलाधिपति ने प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प’ के अंतर्गत विश्वविद्यालय द्वारा किए जा सकने वाले सामाजिक एवं जनहितकारी कार्यों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसरों को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए विश्वविद्यालय को सेवा, जन-जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण एवं समाजोपयोगी गतिविधियों से जोड़कर सार्थक पहल करनी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि स्वर्ण पदक एवं पीएचडी उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या उल्लेखनीय रूप से अधिक है। उन्होंने छात्राओं की इस उपलब्धि को महिला सशक्तिकरण एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनकी बढ़ती भागीदारी का सकारात्मक संकेत बताया तथा सभी उपाधिधारकों एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल का उपयोग केवल अपने व्यक्तिगत विकास के लिए ही नहीं, बल्कि समाज, प्रदेश एवं राष्ट्र के विकास में भी करें। उन्होंने विद्यार्थियों से विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय एवं सार्थक भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों, माता-पिता और समाज के प्रति सम्मान एवं उत्तरदायित्व की भावना बनाए रखने का आग्रह किया।
85 शोधार्थियों को पीएचडी, 27 को स्वर्ण पदक
दीक्षांत समारोह में कला, वाणिज्य, शिक्षा, गृह विज्ञान, विधि, जीव विज्ञान, प्रबंध, शारीरिक शिक्षा, विज्ञान एवं समाज विज्ञान संकायों के कुल 85 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इनमें कला के 10, वाणिज्य के 11, शिक्षा के 3, गृह विज्ञान के 9, विधि के 3, जीव विज्ञान के 15, प्रबंध के 11, शारीरिक शिक्षा के 2, विज्ञान के 5 तथा समाज विज्ञान के 16 शोधार्थी शामिल रहे। इसके अतिरिक्त स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी उपाधियां प्रदान की गईं।
विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। कुलसचिव प्रो. समर बहादुर सिंह ने उपाधि एवं स्वर्ण पदक वितरण की प्रक्रिया संचालित की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पवन मिश्रा ने किया। इस अवसर पर मुख्य समन्वयक प्रोफेसर नीरज गोर, प्रो. रागिनी गोठवाल, डॉ. विवेक शर्मा एवं विपिन व्यास सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।










