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भविष्‍य की आवश्‍यकताओं के अनुरूप है त्रिभाषा फॉमूला : बी. आर. शंकरानंद*



भारतीय शिक्षण मंडल की बैठक को अखिल भारतीय संगठन मंत्री ने किया संबोधित

नई दिल्‍ली – राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत तीन भाषा नीति एक संतुल‍ित, समावेशी एवं भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए किया गया महत्‍वपूर्ण सुधार है। त्रिभाषा फॉमूले के संबंध में फैलाई जा रही सूचनाएं तथ्‍यहीन एवं भ्रामक हैं। यह बात भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी. आर. शंकरानंद ने कही। वे भारतीय शिक्षण मंडल की अखिल भारतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक  भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री सच्चिदानंद जोशी भी उपस्थित थे।

श्री शंकरानंद ने आगे कहा कि यह नीति भारत की बहुभाषी संस्‍कृत‍ि को प्रतिब‍िंबित करती है जिसमें देश भर में अनेक बच्‍चे अपने दैनिक जीवन में दो से अधिक भाषाओं का उपयोग करते हैं। इसका उद्देश्‍य विद्यार्थ‍ियों में संचार कौशल, मानसिक क्षमता, बहुभाषिक दक्षता का विकास करना है जिससे विद्यार्थी उच्‍च शिक्षा, रोजगार एवं समाज को और बेहतर बनाने के लिए तैयार हो सकें।

उन्होंने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के तीन भाषा फॉमूले के लागू किए जाने पर विरोध करने का कारण अंग्रेजी शिक्षि‍त अभिजात्‍य वर्ग की ‘मैकाले मानसिकता’ है। यह नीति भारतीय भाषाओं को प्रोत्‍साहित करती है और बहुभाषिक दक्षता को मजबूती देती है। इसके साथ ही विद्यार्थियों के विकल्‍पों का विस्‍तार करती है तथा देशभर में समान समावेशी शिक्षा को समर्थन देती है।

श्री शंकरानंद ने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्‍ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा- स्‍कूल शिक्षा 2023 (एनसीएफ-एसई) में शिक्षण एवं अधिगम में बहुभाषिकता और भाषा के महत्‍व पर बल दिया गया है। नीति के अनुसार तीन भाषा सूत्र को अधिक लचीला बनाकर लागू किया गया है।

श्री शंकरानंद ने कहा कि किसी भी राज्‍य पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। विद्यार्थियों को कम से कम दो भारतीय भाषाएं सीखने का अवसर मिलेगा। त्रिभाषा नीति देश को भविष्‍य में औपनिवेशिकता से बाहर निकालते हुए एक सुदृढ़ देश के निर्माण में सहयोगी बनेगी। एनसीएफ-एसई 2023 का उद्देश्‍य माध्‍यमिक स्‍तर तक के विद्यार्थियों में तीन भाषाओं में शैक्षणिक दक्षता, भाषायी कौशल तथा भारतीय भाषाओं ओर साहित्‍य की समझ विकस‍ित करना है।

उन्‍होंने कहा कि तमिलनाडु और पुडुच्‍चेरी को छोड़कर भारत के सभी राज्‍य माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड पहले से ही कक्षा 6 से 10 अथवा कक्षा 8 से 10 तक तीन भाषा नीति का पालन करते हैं। ये राज्‍य माध्‍यमिक स्‍तर पर तृतीय भाषा में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा आयोजित कराते हैं। पिछले शैक्षणिक सत्र तक सीबीएसई में कक्षा छह से कक्षा 12वीं तक तीन भाषाएं और कक्षा 9-10 वीं में केवल दो भाषाएं पढ़ाई जाती थीं। इससे सीबीएसई एवं राज्‍य के शिक्षा बोर्डों के विद्यार्थियों के बीच असंतुलन की स्थिति पैदा हो गई थी। नई व्‍यवस्‍था देशभर में स्‍कूली शिक्षा में समानता एवं भाषायी एकरूपता स्‍थापित करेगी।

बैठक को संबोधि‍त करते हुए श्री बी. आर. शंकरानंद ने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा एनसीएफएसई के प्रावधानों के अनुरूप सीबीएसई इस नीति को लागू कर रही है। सीबीएसई की वर्तमान तीन भाषा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों को कक्षा एक से पांच तक दो भाषाएं (आर 1 और आर 2) तथा कक्षा छह से कक्षा दसवीं तक तीन भाषाएं (आर 1, आर 2 और आर 3) पढ़नी होंगी। इस नीति में भाषा चयन करने की सुविधा प्रदान की गई है, इसके साथ ही तय किया गया है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं हों।

उन्‍होंने कहा कि सीबीएसई से मान्‍यता प्राप्‍त विद्यालय स्‍वाभाविक रूप से बहुभाषी हैं। इनमें विभिन्‍न भाषायी परिवेश वाले राज्‍यों के विद्यार्थी अध्‍ययन करते हैं। इस विविधता को ध्‍यान में रखते हुए सीबीएसई वर्तमान में 44 भाषाओं को पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर चुका है, जिसमें संविधान की अनूसूची की सभी 22 भाषाएं  एवं 9 विदेशी भाषाएं सम्मिलित हैं। त्रिभाषा सूत्र विद्यार्थियों और भारत के भविष्‍य के लिए हितकर है।

भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अध्यक्ष श्री सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि भारत बहुभाषिक संस्कृति वाला देश है। जब हम विदेश जाते हैं तो अधिकांश देशों के लोग उनकी मातृभाषा में ही बात करना पसंद करते हैं।त्रिभाषा सूत्र से विद्यार्थी अपनी मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा और एक विदेशी भाषा का अध्ययन करेंगे जो उनके मानसिक विकास एवं कौशल दक्षता की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी होगा।

उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तैयार की जा रही थी तब देशभर के शिक्षाविद, विद्वान और मनीषियों ने इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया था। इसके पश्चात विद्यार्थी के लिए अध्ययन में सुगम एवं हितकारी दृष्टिकोण से ही नीति का निर्माण किया गया था। त्रिभाषा सूत्र भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

वर्चुअल माध्‍यम से आयोजित इस बैठक में भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय से लेकर जिला टोली स्‍तर के देशभर के 45 प्रांतों के 950 कार्यकर्ता सम्मिलित रहे।

Vijay Vishwakarma

Vijay Vishwakarma is a respected journalist based in Bhopal, who reports for Goodluck Media News. He is known for his exceptional reporting skills and extensive knowledge of the region. With a keen eye for detail and a passion for uncovering the truth, he has earned a reputation as a reliable and trustworthy source of news.

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