उच्च शिक्षा मंत्री एवं कृषि मंत्री सहित उच्च शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव की बौद्धिक क्षमता एवं कर्तव्य सेवा सहित भ्रष्टाचार मुक्त छवि पर गंभीर प्रश्न? छात्रहित सहित नियमों से खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय आदेश क्रमांक 69/F-01-06/2017/38-3 भोपाल, दिनांक 02 /02 /2026
प्रति,
1. कुलसचिव, समस्त राज्य विश्वविद्यालय (19), मध्यप्रदेश। ।
2. प्राचार्य, समस्त महाविद्यालय (शासकीय एवं अशासकीय), मध्यप्रदेश।
3. सचिव, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग, भोपाल।
विषयः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (छात्रों की शिकायतों का निवारण) विनियम, 2023 के अनुसार लोकपाल द्वारा विद्यार्थियों की शिकायतों के निवारण एवं विश्वविद्यालय द्वारा आवश्यक कार्यवाही के संबंध में।
सन्दर्भः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (पर्चा की शिकायों का निवारण) विनियम, 2023 जारी किया गया है परंतु यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय इस आदेश के अधीन है या नहीं उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल द्वारा जारी इस आदेश के परिपालन में स्पष्ट करने की पूर्ण जिम्मेदारी एवं उत्तरदायित्व सहित अधिकारक्षेत्र विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन जी एवं सी सी सेल एवं शाखा 3 प्रभारी डॉ अनिल पाठक सहित उच्च शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि क्या महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय प्रबंधन इस आदेश के परिपालन हेतु बाध्य है या नहीं यह एक संवैधानिक प्रश्न सभी से है क्योंकि उक्त विश्वविद्यालय निजी है,राज्य है अथवा केन्द्रीय विश्वविद्यालय है किसी के पास स्पष्ट जवाब ही नहीं है,और उच्च न्यायलय जबलपुर में विगत पंद्रह वर्षों से स्थगन आदेशों को शासन के अधिकारियों द्वारा जानबूझकर लंबित क्यों रखा गया है, इस विश्वविद्यालय अधिनियम में क्या प्रावधान हैं, उनका पालन नहीं किया जाकर न्यायालय के उक्त आदेशों का हवाला देकर सब मलाई खाने में लगे हैं, छात्रों को स्पष्ट जानकारी ना तो उच्च शिक्षा विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन देता है और ना ही विश्वविद्यालय प्रबंधन अंकसूची वैद्यता की जानकारी भी नहीं दी जाती। छात्रहित सहित नियमों से खिलवाड़ कर
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा एक पक्षीय पक्षपातपूर्ण कार्यवाही मात्र विश्वविद्यालय प्रबंधन को संरक्षण देकर फायदा पहुँचाने हेतु की जाती है। गंभीर प्रश्न तो उच्च अधिकारियों सहित विभागीय मंत्री की बौद्धिक क्षमता एवं कर्तव्य सेवा शर्तों पर भी है क्योंकि महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय फरवरी 2025 से कुलाधिपति विहीन है, कुलगुरु की नियुक्ति भी नियमानुसार नहीं है, कुलगुरु की नियुक्ति किस विज्ञापन पर किस आवेदन पर किसने की, नियमित कुलसचिव के स्थान पर 2007 से प्रभारी कुलसचिव कार्यरत हैं तथा महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा दिनांक 27/01/2026 को कृषि विज्ञान केन्द्र पिपरोध के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख को पत्र लिखकर शासकीय विभागीय तीन वैज्ञानिकों को एक आधिकारिक विभागीय कर्तव्य के लिए प्रतिनियुक्त करने हेतु निर्देशित किया जबकि नियमानुसार कृषि (Agriculture) पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए मुख्य रूप से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR – Indian Council of Agricultural Research) की मान्यता और उसके तहत आने वाले राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड (NAEAB) से प्रत्यायन (Accreditation) अनिवार्य है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और संबंधित राज्य सरकार/राज्य कृषि विश्वविद्यालय से संबद्धता आवश्यक है तो फिर किस अधिकार से एक विवादित विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा शासन को निर्देशित किया जा रहा है तथा सरकार तथा विभाग के मंत्री मौन होकर छात्रहित सहित नियमों से खिलवाड़ होने दे रहे हैं आखिर क्यों यह गंभीर प्रश्न तो उच्च शिक्षा मंत्री एवं कृषि मंत्री की बौद्धिक क्षमता एवं कर्तव्य सेवा सहित भ्रष्टाचार मुक्त छवि पर भी है????











