आईटीआई भोपाल की स्विंग टेक्नोलॉजी ट्रेड से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले श्री अरविंद नामदेव को लिए 60 लाख की अनुदान सहायता की घोषणा की मदन कुमार, आयुक्त, हैंडलूम विभाग ने स्विंग टेक्नोलॉजी ट्रेड से

कौशल से उद्यमिता तक।2016 में आईटीआई भोपाल की स्विंग टेक्नोलॉजी ट्रेड से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले श्री अरविंद नामदेव ने अपने करियर की शुरुआत एक छोटे से सिलाई और बुटीक कार्य से की थी। प्रशिक्षण के दौरान मिले व्याव हारिक ज्ञान और नवाचार की लगन ने उन्हें आगे बढ़ाया। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए, उनकी प्रशिक्षक श्रीमती स्मृति श्रीवास्तव ने उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया और नौकरी तक सीमित न रहकर उद्यमिता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। समय के साथ उनका रुझान टेक्सटाइल वीविंग और हैंडलूम की ओर बढ़ा। उन्होंने बुनकरों को संगठित कर वर्ष 2024 में एन-प्रियांस हैंडलूम प्रोड्यूसर प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। बुनकर सेवा केंद्र, इंदौर से उन्हें 13 लाख की अनुदान सहायता मिली, जिससे उन्होंने कॉटन, खादी कॉटन और अन्य हैंडलूम उत्पादों का निर्माण बड़े स्तर पर शुरू किया। उनकी उत्कृष्ट गुणवत्ता और नवाचार को देखते हुए, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उन्हें देश के विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, अहमदाबाद, गोवा, मुंबई, गुवाहाटी आदि में उत्पाद प्रदर्शन के अवसर मिले। वर्तमान में वे सिर्फ एक उद्यमी ही नहीं बल्कि प्रशिक्षक भी हैं, जो प्रत्येक वर्ष आईटीआई भोपाल सहित एनआईएफटी, एनआईडी, क्रिस्प, पॉलिटेक्निक और अन्य संस्थानों के विद्यार्थियों को टेक्सटाइल वीविंग की ट्रेनिंग देते हैं। वर्ष 2025 और 2026 में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस पर सम्मानित किया गया। आज उनकी संस्था हैंडलूम उत्पादों के साथ-साथ पुरुषों के कुर्ता-पायजामा, जैकेट, महिलाओं की कुर्ती, पैंट, टॉप, साड़ी, काथा वर्क, हस्तनिर्मित खिलौने और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद भी बना रही है। इनके साथ 50 से अधिक वंचित वर्ग की महिलाएँ जुड़कर स्वरोज़गार प्राप्त कर रही हैं, और इनका लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है ताकि महिलाएँ अपने घरों से कुटीर उद्योग के माध्यम से कार्य कर सकें। 14 अगस्त 2025 को श्री मदन कुमार, आयुक्त, हैंडलूम विभाग ने इनकी संस्था का निरीक्षण किया। उनके कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने नरीला कॉलेज की खाली इमारत में हैंडलूम ट्रेनिंग और प्रोडक्शन सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां प्रशिक्षण और रोजगार दोनों की व्यवस्था होगी। साथ ही चरखा, हैंडलूम मशीनों और कच्चे माल के लिए 60 लाख की अनुदान सहायता की घोषणा भी की गई। श्री अरविंद नामदेव का लक्ष्य है कि आईटीआई की इच्छुक छात्राओं सहित अधिक से अधिक महिलाओं को कुटीर उद्योग से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराई जाए। इस दिशा में उनकी पूर्व प्रशिक्षक श्रीमती स्मृति श्रीवास्तव भी छात्राओं को प्रेरित करने में सहयोग दे रही हैं। यह कहानी दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण, निरंतर मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प से कोई भी प्रशिक्षु सफल उद्यमी, रोजगार सृजक और समाज परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।






