सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार,उच्च शिक्षा मंत्री को बदनाम करने की साज़िश …

संविधान का उलंघन करके नियम बनाते आधुनिक सेवक …..!
अतिथि विद्वानों को बाहर करने का षडयंत्र रचते प्रभारी ओएसडी .. अतिथि विद्वान एवं न्यायालय शाखा…?
विभाग प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस मे भर्ती के बाद वगैर चयनित लोगों को हटाने में असफल रहा है के लिए अतिथि विद्वानों को बना रखा ग्रास ……!
उच्च शिक्षा विभाग, अतिथि विद्वानों को बाहर करने जा रहा है और स्टे समाप्त करने के लिए माननीय न्यायालय में ज़बाब प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है जिसके संबंध में कालेजो को पत्र जारी कर माननीय न्यायालय में ज़बाब देने के लिए लिखा गया है।
अवगत हो कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने अतिथि विद्वान भर्ती नियम 2015-2016 के तहत कार्यरत है। इसी दौरान माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा है कि अतिथि विद्वानों को नये पंजीकृत आवेदकों अर्थात जिसने अतिथि विद्वान के लिए आवेदन किया है से प्रतिस्थापित नहीं कर सकते। केवल नियमित भर्ती से प्रतिस्थापित कर सकते है। उसके बाद विभाग ने ट्रान्सफर से अतिथि विद्वानों को फालन आऊट के नाम पर बदलने लगा। ।
इसके बाद प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस मे अलग शिक्षक पढ़ायेगा और जो प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस के साक्षात्कार में फेल हो जायेगा प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस मे नही पढ़ायेगा का अवैधानिक भर्ती तो कर लिया लेकिन जो लोग साक्षात्कार में फेल हो गए या बैठे ही नही को हटा भी नहीं सका। इस दौरान प्रधानमंत्री कालेज आफ एक्सीलेंस के लिए चयनित लोगों को रिडिप्लाय के नाम पर गोरखधंधा चल रहा था। जिससे आदेश आने के बाद अतिथि विद्वान माननीय न्यायालय के शरण में गए और मिला स्टे। लेकिन जब सेवक बेईमानी पर उतर आए तो भगवान भी कुछ नही कर सकता…
जारी पत्र से स्पष्ट है कि विभाग प्रमुख अपने संवैधानिक दायित्व से परे जाकर स्टे समाप्त करने और अतिथि विद्वान की आवश्यकता नहीं है का जबाब प्रस्तुत करने जेसे निर्णय लिया है तभी तो इस प्रकार का पत्र जारी किया गया है सनद रहे कि अतिथि विद्वान भर्ती में केवल प्रमुख सचिव को कुछ भी करने का संवैधानिक अधिकार है.. वैसे प्रशासकीय मंत्री जी ने ऐसा तो नही करेंगें कि मंत्री परिषद के निर्णय बदल देवे… अगर किया है तो वही बता सकते है अन्यथा प्रमुख सचिव…
पत्र के अध्ययन से पता चल रहा है कि विभाग बाहर करने के लिए ओआईसी के माध्यम से निम्न जबाब प्रस्तुत करेगा…
ज़बाब में क्या क्या हो सकता है……
१-अतिथि विद्वानों को प्राचार्य नहीं सचिव जनभागीदारी समिति ने आमंत्रित किया है…..
२-अतिथि विद्वानों से शपथ पत्र नहीं लिया गया है ..?
३- अतिथि विद्वानों को 2019 एव 2023 के बाद नियुक्त किया गया है..?
4- नियुक्ती होने के बाद फालन आऊट करने और कालेज आवंटित करने का माननीय न्यायालय का आदेश नहीं है..?
५- यह सब अतिथि विद्वान प्रभारी ओएसडी की काले कारनामों को पर्दा डालने का घिनौना चेहरा…
६-प्रमुख सचिव और आयुक्त को माननीय न्यायालय ने अप्रैल में खरी-खोटी सुनाई..!
७- अगर बेईमानी नहीं है तो लिख कर विभाग शपथ पत्र सार्वजनिक कर झंझट समाप्त करें कि भविष्य में अतिथि विद्वान या बदले नाम से रिक्त पदों पर कोई आमंत्रित नहीं किया जायेगा और ना ही मानसेवी , विजिटिंग आदि..




