अधर्म के नाश के लिये एवं धर्म और मर्यादा की स्थापना के लिये ही रामजी का अवतार हुआ था।

*”अधर्म के नाश के लिये एवं धर्म और मर्यादा की स्थापना के लिये ही रामजी का अवतार हुआ था।”

संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि
सी. के. ग्रीन्स कॉलोनी बुरहानपुर मे 10 नवंबर से 16 नवम्बर तक आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का पंचम दिवस था और आज षठा दिन था।
कथाव्यास उज्जैन निवासी प. पू. श्री गिरीश गुरुजी (बालक) द्वारा पंचम दिवस पर रघुकुल का वर्णन किया। उपरोक्त जानकारी देते हुए सामाजिक भक्त ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि
ज़ब रघुकुल मे रामजी का अवतार हुआ तब बाकी देवताओं ने भी भालू और कपी रुपमे जन्म लिया। शिवजी ने चैत्र पूर्णिमा को सूर्योदय समय हस्त नक्षत्र मे हनुमानजी के रुपमे जन्म लिया, हनुमान जी का जन्मनाम षण्मुख था। मनुष्य पृथ्वी पर जन्म लेकर आते है और देवता अवतरीत होते है। सभी देवता अपने अपने स्वरूप मे अवतरित हुए।
प्रभु रामजी का जन्म पूनर्वसु नक्षत्र मे हुआ है इसलिए उनका नाम हितकारी रखा गया। कथा मे गुरुजी ने रामजी के लीलाओ का, श्रीराम सीता विवाह का एवं जीवन कार्य का वर्णन किया। गुरुजी कहते है अधर्म के नाश के लिये एवं धर्म और मर्यादा की स्थापना के लिये ही रामजी का अवतार हुआ था।
आज गुरुजी दत्त जन्म की कथा सुनाई तत्पश्चात श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।
आज षठे दिन गुरुजी श्रीकृष्ण जी के विविध लीलाओ का वर्णन किया।
कथा मे भक्तोंने श्रीकृष्ण और गोपी रासलीला एवं मटकी फोड मनमोहक झांकी का आनन्द लिया।
श्री गुरुजी के अमृत वचनों को श्रवण करने के लिये आप सपरिवार आमंत्रित है।


